झारखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों में 1 सितंबर से पोषाहार बंद! गढ़वा में सेविकाओं और सहायिकाओं का आंदोलन तेज

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बैठक करते आंगनवाड़ी वर्कर्स यूनियन के लोग | Prabhat Khabar Network

झारखंड में आंगनवाड़ी सेविकाओं ने बकाया भुगतान न होने और कम बजट के विरोध में 1 सितंबर से पोषाहार वितरण बंद कर दिया है। जानें पूरी खबर।

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गढ़वा से पीयूष तिवारी की रिपोर्ट

Garhwa News: झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन के बैनर तले राज्यभर की आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने अपने आंदोलन को तेज कर दिया है. एक सितंबर से आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष के बच्चों को दिया जाने वाला पका हुआ नाश्ता और भोजन पूरी तरह बंद कर दिया गया है. यूनियन का कहना है कि पिछले आठ महीनों से पोषाहार मद की राशि का भुगतान नहीं होने के कारण अब उधार लेकर केंद्रों का संचालन करना संभव नहीं रह गया है. इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को गढ़वा अनुमंडल कार्यालय परिसर में गढ़वा प्रखंड की प्रमुख सेविकाओं और सहायिकाओं की बैठक आयोजित की गई. बैठक में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुंद सिंह मौजूद रहे, जबकि इसकी अध्यक्षता गढ़वा परियोजना अध्यक्ष कौशल्या देवी ने की.

आठ महीने से नहीं मिला पोषाहार का भुगतान

बैठक को संबोधित करते हुए बालमुकुंद सिंह ने कहा कि सेविकाएं लंबे समय से अपनी जेब और उधार के भरोसे पोषाहार सामग्री खरीदकर केंद्रों का संचालन कर रही थीं. लेकिन लगातार आठ महीने से विभाग की ओर से भुगतान नहीं होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार बकाया राशि का भुगतान नहीं करती, तब तक सेविकाएं उधार लेकर पोषाहार सामग्री नहीं खरीदेंगी और आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने सभी सेविकाओं और सहायिकाओं से आंदोलन को पूरी तरह सफल बनाने की अपील भी की.

सरकारी दर और बाजार भाव में बड़ा अंतर

परियोजना अध्यक्ष कौशल्या देवी ने कहा कि सरकार जिन दरों पर सामग्री खरीदने का भुगतान करती है, वे मौजूदा बाजार कीमतों से काफी कम हैं. उन्होंने बताया कि चीनी के लिए 38 रुपये प्रति किलो और सरसों तेल के लिए 100 रुपये प्रति लीटर की दर तय है, जबकि बाजार में चीनी करीब 75 रुपये प्रति किलो और सरसों तेल लगभग 200 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि अंडा बाजार में 9 से 10 रुपये प्रति पीस मिल रहा है, जबकि सरकार केवल 6 रुपये प्रति अंडा की दर से भुगतान करती है. ऐसे में निर्धारित मेन्यू के अनुसार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषाहार उपलब्ध कराना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है.

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जांच के डर से भी बढ़ी परेशानी

सेविकाओं ने कहा कि यदि वे बाजार की वास्तविक कीमत पर सामग्री खरीदकर उसी हिसाब से वाउचर बनवाती हैं, तो भविष्य में विभागीय जांच के दौरान सरकारी दर से अधिक खरीदारी का आरोप लगाकर कार्रवाई की जा सकती है. इस दोहरी परेशानी के कारण वे आंदोलन के लिए विवश हुई हैं. यूनियन ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और केंद्रों में पका हुआ भोजन शुरू नहीं किया जाएगा. बैठक में प्रदेश संयोजक रामचंद्र पासवान, कौशल्या देवी, निभा देवी, वृंदा देवी, रीता देवी, प्रभा देवी, इस्लाम अंसारी, दुर्गा देवी, रितु कुमारी, शीला देवी, अनीता देवी, जहांआरा, शिवकुमारी देवी, उर्मिला देवी सहित बड़ी संख्या में सेविकाएं और सहायिकाएं मौजूद थीं.

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