कुलपति के हाथों हुआ डॉ महाश्वेता रचित पुस्तक ''योग शिक्षा के विविध आयाम'' का लोकार्पण

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कुलपति ने डॉ महाश्वेता के शोधपरक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि योग आज के समय की अत्यावश्यक आवश्यकता बन चुका है.

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दुमका. एसपी महिला महाविद्यालय दुमका की संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका डॉ महाश्वेता की नवीन पुस्तक ””योग शिक्षा के विविध आयाम”” का लोकार्पण विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर कुनुल कांडिर के करकमलों से हुआ. यह आयोजन विभागीय स्तर पर गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ. इस अवसर पर कुलपति ने डॉ महाश्वेता के शोधपरक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि योग आज के समय की अत्यावश्यक आवश्यकता बन चुका है. डॉ महाश्वेता की यह कृति न केवल शैक्षिक दृष्टि से उपयोगी है, अपितु समाज में योग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी. संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ धनंजय कुमार मिश्र ने पुस्तक की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह ग्रंथ योग के शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक पक्षों का संतुलित समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जो शोधार्थियों, शिक्षकों एवं साधकों सभी के लिए लाभकारी है. इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ सदस्य डॉ राणा प्रताप सिंह तथा डॉ भारती प्रसाद ने भी अपने विचार रखे तथा लेखिका को शुभकामनाएं दीं. डॉ सिंह ने कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की दृष्टि से प्रस्तुत पुस्तक छात्र छात्राओं के लिए काफी उपयोगी साबित होगी. डॉ भारती प्रसाद ने डॉ महाश्वेता के कार्य की सराहना करते हुए प्रस्तुत पुस्तक को न केवल योग शिक्षा के लिए अपितु नैतिक, सामाजिक और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी उपयोगी बताया. डॉ महाश्वेता ने पुस्तक लेखन की प्रेरणा साझा करते हुए कहा कि भारतीय मनीषा में निहित योग-दर्शन की परंपरा को समकालीन परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करना मेरा उद्देश्य रहा है.

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