करेले की खेती से संवर रही महिलाओं की तकदीर, 44 किसान बढ़ा रहीं आमदनी

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करेले की खेती कर जीविकोपार्जन करती महिलाएं | Prabhat Khabar Network

जेएसएलपीएस की मदद से दलाही पंचायत की महिलाओं ने करेले की खेती से बदली आजीविका. 44 किसान 4.40 एकड़ में उत्पादन कर रहे हैं.

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दुमका : मसलिया प्रखंड अंतर्गत दलाही पंचायत में जेएसएलपीएस की आईएफसी योजना के सहयोग से सखी मंडल की दीदियां सब्जी की खेती को आजीविका का बेहतर साधन बनाने में जुटी हैं. योजना के तहत बीज का सहयोग मिलने के बाद महिलाओं में करेला समेत अन्य मौसमी सब्जियों की खेती के प्रति रुचि बढ़ी है. छोटी-छोटी जोत वाली जमीन का बेहतर उपयोग कर महिलाएं उत्पादन बढ़ाने के साथ अपनी आय में भी इजाफा करने का प्रयास कर रही हैं. दलाही पंचायत के मधुबन, अगुआजोरी और श्यामपुर गांव में 44 किसान करेला की खेती कर रहे हैं. मधुबन गांव में 14, अगुआजोरी में 12 और श्यामपुर में 18 किसान इस खेती से जुड़े हैं. प्रत्येक किसान औसतन 10 डिसमिल जमीन में करेला की खेती कर रहा है. इस तरह तीनों गांवों में करीब 4.40 एकड़ भूमि में करेला का उत्पादन किया जा रहा है. इन किसानों को बीज का सहयोग आईएफसी कार्यक्रम के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है.

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करेला के साथ मौसमी सब्जियों की भी खेती

महिलाएं करेला की खेती के साथ अन्य मौसमी सब्जियों का भी उत्पादन कर रही हैं. इससे उन्हें किसी एक फसल पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है. अलग-अलग मौसम में विभिन्न सब्जियों का उत्पादन कर महिलाएं लगातार आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. खेत से निकलने वाली सब्जियों का एक हिस्सा परिवार की जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल हो रहा है, जबकि अतिरिक्त उत्पादन स्थानीय बाजार में बेचकर महिलाएं नकद आय प्राप्त कर रही हैं.

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खेती के हर काम में महिलाएं निभा रहीं अहम भूमिका

सब्जी की खेती में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. खेत तैयार करने से लेकर बुवाई, सिंचाई, निराई-गुड़ाई और फसल की देखभाल तक महिलाएं सक्रिय रूप से अपनी भूमिका निभा रही हैं. खेती से जुड़ने के कारण उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है. सखी मंडल से जुड़ी महिलाओं के लिए सब्जी उत्पादन अब केवल घरेलू जरूरत पूरी करने का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार की आमदनी बढ़ाने का जरिया भी बनता जा रहा है.

बीज सहयोग से ग्रामीण महिलाओं को मिला प्रोत्साहन

आईएफसी योजना के तहत मिले बीज सहयोग ने ग्रामीण महिलाओं को सब्जी उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया है. कम भूमि में सब्जी की खेती कर बेहतर उपयोगिता हासिल करने की कोशिश की जा रही है. महिलाओं का कहना है कि यदि खेती के लिए समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, बीज और अन्य जरूरी सहयोग मिलता रहे तो वे सब्जी उत्पादन को और बड़े स्तर पर ले जा सकती हैं.

महिलाओं की मेहनत से मजबूत हो रही परिवार की आजीविका

आईएफसी योजना के सहयोग और महिलाओं की मेहनत से क्षेत्र में सब्जी उत्पादन को नई गति मिल रही है. करेला की खेती से शुरू हुई यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार की आजीविका मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है. स्थानीय स्तर पर उत्पादन और बिक्री बढ़ने से महिलाओं के लिए खेती को आय के स्थायी साधन के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं.




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Anand Jayswal

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