रानीश्वर में कूड़ेदान बेकार, न सफाई का पता न देखरेख की जिम्मेदारी
रानीश्वर में सड़क किनारे बदहाल स्थिति में लगा लोहे का कूड़ेदान. | Prabhat Khabar Network
रानीश्वर में स्वच्छता के नाम पर लगाए गए लोहे के कूड़ेदान अब उपेक्षित हो रहे हैं. झाड़ियों से घिरे और टूटे-फूटे ये कूड़ेदान अपनी उपयोगिता खो चुके हैं. ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि इनके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है और कब इनकी सुध ली जाएगी.
रानीश्वर: स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से रानीश्वर प्रखंड के विभिन्न चौक-चौराहों, सड़क किनारे, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के पास लगाए गए लोहे की जाली वाले कूड़ेदान अब अपनी उपयोगिता खोते नजर आ रहे हैं. कई जगह कूड़ेदान झाड़ियों से घिर गए हैं, तो कहीं इनके हिस्से गायब हो चुके हैं.
हैरानी की बात यह है कि इन कूड़ेदानों को किस विभाग की ओर से लगाया गया है, इसकी जानकारी ग्रामीणों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पंचायत के मुखिया को भी इसकी जानकारी नहीं है. एक पंचायत के मुखिया से इस संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने भी इसके बारे में अनभिज्ञता जताई.
कूड़ा डालें तो सफाई कौन करेगा, किसी को पता नहीं
कूड़ेदान लगाए जाने के बावजूद सबसे बड़ा सवाल इनकी साफ-सफाई और रखरखाव को लेकर है. चौक-चौराहों और सड़क किनारे लगाए गए कूड़ेदानों से कचरा उठाने की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी है.
ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ कूड़ेदान लगा देने से स्वच्छता व्यवस्था बेहतर नहीं होगी. नियमित सफाई और कचरा उठाने की व्यवस्था भी जरूरी है.
स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों के पास लगाए गए कूड़ेदानों का उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है और वहां साफ-सफाई की व्यवस्था भी संभव है. लेकिन सड़क किनारे और चौक-चौराहों पर रखे कूड़ेदानों की देखरेख को लेकर स्थिति साफ नहीं है.
कहीं गेट गायब, कहीं टीन की छत उखड़ी
लोहे के इन कूड़ेदानों का निर्माण चार पतले लोहे के एंगल से किया गया है. तीन तरफ तार की जाली से घेरा गया है, जबकि सामने लोहे का ग्रील गेट लगाया गया है. ऊपर टीन की छत बनाई गई है.
लेकिन देखरेख के अभाव में कई कूड़ेदान बदहाल हो चुके हैं. कहीं टीन की छत गायब है तो कहीं लोहे का ग्रील गेट ही नहीं है. सड़क किनारे लगाए गए कई कूड़ेदानों के चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं.
ग्रामीण बोले- जल्द कबाड़ बन जाएंगे
ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन कूड़ेदानों की नियमित सफाई और देखरेख की जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो आने वाले दिनों में ये कबाड़ में तब्दील हो जाएंगे.
ग्रामीणों के मुताबिक लोहे से बने होने के कारण कुछ समय बाद कबाड़ खरीदने वाले इन्हें उठा ले जाएंगे और पश्चिम बंगाल के राजनगर स्थित कबाड़खाने में बेच सकते हैं.
ग्रामीणों का सवाल है कि जब लाखों रुपये खर्च कर ऐसी संरचनाएं लगाई गई हैं तो इनके रखरखाव की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई.
यह भी पढ़ें:
टोंगरा में 55 लाख का हेल्थ सेंटर, ग्रामीणों को गांव में ही इलाज की उम्मीद
कितनी राशि खर्च हुई, यह भी स्पष्ट नहीं
जानकारी के अनुसार रानीश्वर प्रखंड क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे लोहे के कूड़ेदान लगाए गए हैं. हालांकि इन्हें लगाने में कितनी प्राक्कलित राशि खर्च की गई, इसकी जानकारी भी स्पष्ट नहीं हो सकी है.
अब सवाल यह है कि स्वच्छता के उद्देश्य से लगाए गए इन कूड़ेदानों का इस्तेमाल और रखरखाव कब शुरू होगा और इनके लिए जिम्मेदार विभाग या एजेंसी कौन है.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए