मुआवजा-रोजगार की मांग पर अड़े रैयत, ओड़मो कोल कंपनी के खिलाफ पांचवें दिन भी चक्का जाम
गोपीकांदर में कोल कंपनी के खिलाफ अनिश्चितकालीन चक्का जाम का पांचवां दिन जारी, वार्ता बेनतीजा. | Prabhat Khabar Network
गोपीकांदर में ओड़मो कोल कंपनी के खिलाफ अनिश्चितकालीन चक्का जाम पांचवें दिन भी जारी रहा. ग्रामीण मुआवजा और रोजगार की मांग पर अड़े हैं, जिससे वार्ताएं बेनतीजा साबित हो रही हैं. कंपनी के खिलाफ आंदोलन अब लिखित आश्वासन मिलने तक जारी रहने की उम्मीद है.
प्रतिनिधि, गोपीकांदर : आदिवासी मूलवासी प्रभावित संघर्ष समिति, ओड़मो कोल कंपनी के खिलाफ चल रहा अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रहा. गोपीकांदर थाना क्षेत्र के सिलंगी-गुम्मामोड़ सड़क पर ओड़मो पंचायत के समीप बीते सोमवार से आंदोलन जारी है. आंदोलनकारी केवल कोल कंपनी के वाहनों का परिचालन बाधित कर रहे हैं. जबकि आम लोगों और अन्य वाहनों को जाम से मुक्त रखा गया है.

अधिकारियों ने दिया एक सप्ताह में मुआवजे का आश्वासन
शुक्रवार को आंदोलन समाप्त कराने के उद्देश्य से गोपीकांदर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) विजय प्रकाश मरांडी, थाना प्रभारी सुमित कुमार भगत तथा कोल कंपनी के पदाधिकारी आंदोलन स्थल पहुंचे. इस दौरान ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच वार्ता हुई. बीडीओ ने रैयतों की भूमि मुआवजा संबंधी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक सप्ताह के भीतर मुआवजा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. साथ ही जिन रैयतों की मृत्यु हो चुकी है, उनके उत्तराधिकार संबंधी आवश्यक प्रमाण पत्र शीघ्र बनाने का निर्देश कर्मचारी पिटर सोरेन को दिया. हालांकि घंटों चली बातचीत के बावजूद कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी. ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और अधिकारियों को बिना किसी निष्कर्ष के वापस लौटना पड़ा.
लिखित आश्वासन तक आंदोलन जारी रखने की बात
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन के वरीय अधिकारी उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देते तब तक आंदोलन जारी रहेगा. प्रभावित क्षेत्रों के रैयतों की मांग है कि स्थानीय लोगों को कंपनी में मजदूर, राजमिस्त्री समेत सभी प्रकार के कार्यों में प्राथमिकता के आधार पर नियोजन दिया जाए तथा योग्य युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए. आंदोलन के दौरान ग्रामीण अनिल टुडू ने बताया कि वर्ष 2023 में कंपनी द्वारा स्थानीय युवाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया गया था, लेकिन वर्ष 2026 तक प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध नहीं कराया गया. उन्होंने कहा कि कंपनी को इस मामले में जल्द पहल करनी चाहिए ताकि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके.
प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं का भी मुद्दा
ग्रामीणों ने क्षेत्र में बढ़ते वायु, जल एवं ध्वनि प्रदूषण पर भी चिंता व्यक्त की. उनका कहना है कि खनन गतिविधियों के कारण गांवों में पर्यावरणीय प्रभाव बढ़ रहा है. उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्ययोजना लागू करने, नियमित पर्यावरणीय सर्वेक्षण कराने तथा प्रभावित क्षेत्रों की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है. इसके अलावा पूरे पंचायत में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, हैंडपंपों की स्थापना, स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल, गांव-गांव में एंबुलेंस सुविधा तथा स्कूली बच्चों के लिए बस सेवा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई. ग्रामीणों ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
प्रोजेक्ट दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
संघर्ष समिति ने कंपनी से यह भी मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में संचालित विकास एवं ग्रीन परियोजनाओं का पूरा प्रोजेक्ट दस्तावेज सार्वजनिक किया जाए, पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन ग्रामीणों के साथ साझा किया जाए तथा प्रभावित परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी दी जाए. चक्का जाम में समिति के अध्यक्ष सामेल मुर्मू, राजदीप मुर्मू, लखीराम राय, मंगल टुडू, सकोल मरांडी, लखन मरांडी समेत बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण शामिल रहे.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए