दुमका में हरियाड़ पूजा, जल-जंगल-जमीन बचाने का लिया संकल्प

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पूजा अर्चना करते संताल आदिवासी.| Prabhat Khabar Network

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दुमका में हरियाड़ पूजा पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न. जल, जंगल, जमीन की रक्षा का संकल्प, प्रकृति के प्रति आस्था और समृद्धि की कामना.

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संवाददाता, दुमका. अच्छी फसल, हरियाली, समृद्धि और समाज की खुशहाली की कामना के साथ रविवार को दुमका स्थित दिशोम जाहेर थान में हरियाड़ पूजा पारंपरिक विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई. दिशोम मांझी थान एवं जाहेर थान समिति, संताल परगना प्रमंडल, दुमका की ओर से आयोजित पूजा में संताल परगना के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाज के लोग और मरांग बुरु भक्त शामिल हुए.

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पूजा के दौरान प्रकृति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लिया गया. पारंपरिक रीति-रिवाज और वेशभूषा में पहुंचे श्रद्धालुओं ने अच्छी फसल, हरियाली और समाज की खुशहाली के लिए प्रार्थना की.

पारंपरिक विधि-विधान से हुई पूजा-अर्चना

रविवार सुबह करीब आठ बजे दिशोम नायकी बाबा सीताराम सोरेन की अगुवाई में पूजा-अर्चना शुरू हुई. समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में दिशोम जाहेर थान पहुंचे और विधि-विधान के साथ पूजा में शामिल हुए.

दिशोम मांझी बाबा बीनीलाल टुडू के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में प्रकृति और पर्यावरण के महत्व पर भी जोर दिया गया. श्रद्धालुओं ने प्रकृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए उसके संरक्षण का संकल्प लिया.

प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक है हरियाड़ पूजा

दिशोम मांझी बाबा बीनीलाल टुडू ने कहा कि हरियाड़ पूजा आदिवासी समाज की प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और कृतज्ञता का प्रतीक है. प्रकृति से ही समाज को जीवन, अन्न और आवश्यक संसाधन प्राप्त होते हैं. इसलिए जल, जंगल और जमीन की रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.

उन्होंने कहा कि पूजा के माध्यम से अच्छी फसल, हरियाली और समाज की खुशहाली की कामना की गयी. साथ ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया गया.

मांझी परगना व्यवस्था को मजबूत करने पर मंथन

पूजा के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद स्वरूप खिचड़ी का वितरण किया गया. इसके बाद पारंपरिक मांझी परगना व्यवस्था को और मजबूत एवं प्रभावी बनाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया.

समाज के लोगों ने पारंपरिक व्यवस्था, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने पर जोर दिया. वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक परंपराओं और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है.

दिशोम मांझी थान और जाहेर थान में जुटे और पूजा अर्चना करते संताल आदिवासी | Prabhat Khabar Network
पूजा अर्चना करते संताल आदिवासी. | Prabhat Khabar Network

बड़ी संख्या में समाज के लोग हुए शामिल

कार्यक्रम में टेकलाल मरांडी, निलेश हांसदा, रामप्रसाद हांसदा, सुनील मरांडी, प्रेम हांसदा, साहेबराम किस्कू, संदीप मुर्मू, शिवशंकर सोरेन, संदीप हांसदा, अनूप हांसदा, दशमत किस्कू, पोरेश मर्म, सुभाष किस्कू, आदित्य हांसदा, राजेंद्र टुडू, राम-लक्ष्मण हांसदा, संजय मुर्मू, प्रदीप मुर्मू, भोला मरांडी, रविंद्र सोरेन और सिमोन मरांडी सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे.

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