साढ़े तीन दशक का राजनीतिक सफर, संगठन से सत्ता तक अपनी अलग पहचान बना गये सुदिव्य सोनू
हेमंत सरकार में मंत्री रहे सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर साढ़े तीन दशक लंबा रहा। शुरुआती दौर में शिबू सोरेन के संपर्क में आने के बाद उन्होंने झामुमो में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
हेमंत सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर करीब साढ़े तीन दशक लंबा रहा. वर्ष 1989 में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संपर्क में आने के बाद उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ सक्रिय राजनीति की शुरुआत की. शुरुआती दौर में सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन के लिए काम करने वाले सुदिव्य कुमार धीरे-धीरे पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते गये. संगठन में लंबी सक्रियता के बाद उन्होंने गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक जमीन तैयार की और 2019 तथा 2024 में लगातार दो बार विधायक चुने गये.
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गोड्डा चुनाव से मिला संगठन का शुरुआती अनुभव
वर्ष 1991 के गोड्डा लोकसभा चुनाव के दौरान झामुमो ने उन्हें विशेष जिम्मेदारी दी थी. वह करीब 45 दिनों तक गोड्डा में रहकर संगठन के निर्देश के अनुसार काम करते रहे. इस दौरान उन्हें चुनावी संगठन और जनसंपर्क का अनुभव मिला. इसके बाद वर्ष 1992 में उन्हें झामुमो गिरिडीह नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली.
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करीब पांच वर्षों तक नगर अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने गिरिडीह शहर में पार्टी के विस्तार के लिए काम किया. वर्ष 2000 में उन्हें झामुमो जिला कमेटी में उपाध्यक्ष बनाया गया. वर्ष 2003 में वह गिरिडीह जिलाध्यक्ष बने और वर्ष 2010 तक संगठन की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद वह केंद्रीय समिति के सचिव और बाद में झामुमो व्यावसायिक मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष भी बने. संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें तीन बार झामुमो केंद्रीय महासचिव की जिम्मेदारी मिली.
ग्रामीण आधार वाली पार्टी की शहर में मजबूत की पकड़
झामुमो का पारंपरिक जनाधार ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत रहा है, जबकि गिरिडीह शहर में पार्टी के लिए अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चुनौती रही. सुदिव्य कुमार ने शहरी इलाकों में जनसंपर्क बढ़ाने और विभिन्न वर्गों को संगठन से जोड़ने पर जोर दिया. स्थानीय समस्याओं और शहरी मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में जगह देने के साथ संगठन की गतिविधियां भी बढ़ायी गयीं.
समय के साथ इसका असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन में दिखा. गिरिडीह के शहरी क्षेत्र में झामुमो का जनाधार बढ़ा और सुदिव्य कुमार पार्टी के लिए प्रमुख चेहरा बनकर उभरे. हाल के नगर निगम चुनाव में झामुमो समर्थित मेयर के निर्वाचित होने को भी उनकी संगठनात्मक रणनीति से जोड़कर देखा गया.
चार बार चुनाव लड़ा, दो बार मिली जीत
सुदिव्य कुमार ने गिरिडीह विधानसभा सीट से चार बार चुनाव लड़ा. वर्ष 2009 में पहली बार झामुमो के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और 8,272 वोट हासिल किये, लेकिन जीत नहीं मिली. वर्ष 2014 में उन्हें 47,517 वोट मिले, जबकि भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 57,450 वोट मिले.
लगातार दो चुनावों में हार के बावजूद उन्होंने संगठनात्मक सक्रियता जारी रखी. युवाओं को पार्टी से जोड़ने, स्थानीय समस्याओं को उठाने और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ाने पर जोर दिया. वर्ष 2019 में इसका परिणाम मिला और उन्होंने 80,871 वोट हासिल कर पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की. वर्ष 2024 में 93,179 वोट हासिल कर लगातार दूसरी बार विधायक बने. इसके बाद उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया.
शिक्षा, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं पर रहा जोर
विधायक और मंत्री के रूप में उनकी प्राथमिकताओं में शिक्षा, खेल, शहरी सुविधाएं और पर्यटन प्रमुख रहे. गिरिडीह को एजुकेशनल हब के रूप में विकसित करने की योजना के तहत सर जेसी बोस विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गयी. इसके अलावा करीब 192 करोड़ रुपये की लागत से राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की आधारशिला रखे जाने से जिले में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के विस्तार की उम्मीद बढ़ी.
गिरिडीह कोलियरी की बंद कबरीबाद माइंस और ओसीपी को दोबारा चालू कराने की दिशा में भी उन्होंने पहल की. पीरटांड़ में मेगा सिंचाई परियोजना को स्वीकृति दिलाने की दिशा में काम किया गया. क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार, सिंचाई, खनन और आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को उन्होंने लगातार उठाया.
शहरी विकास और पर्यटन के लिए भी बनायी योजनाएं
शहरी क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की शहरी जलापूर्ति योजना पर काम आगे बढ़ाया गया. उसरी नदी के विकास और शहर के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से उसरी रिवर फ्रंट और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव रखा गया.
पर्यटन क्षेत्र में भी कई योजनाओं पर पहल की गयी. गिरिडीह में करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से चिड़ियाघर बनाने का प्रस्ताव रखा गया. वहीं खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं देने के उद्देश्य से करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित करने की पहल की गयी.
इस तरह सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर एक सामान्य संगठन कार्यकर्ता से शुरू होकर नगर और जिला संगठन की जिम्मेदारियों, लगातार दो विधानसभा चुनावों में जीत और राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचा. उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा संगठन को मजबूत करने और गिरिडीह में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के प्रयासों से जुड़ा रहा.
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