डॉक्टरों की बहाली में पहली बार अस्पताल चुनने और मानदेय की बोली का विकल्प, नयी संविदा नियमावली लागू

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झारखंड सरकार ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए नई संविदा नियुक्ति नियमावली लागू की है. इस नई व्यवस्था में डॉक्टर अपनी पसंद का अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र चुन सकेंगे और ऑनलाइन मासिक मानदेय की बोली लगा सकेंगे.

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धनबाद. धनबाद समेत झारखंड के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए संविदा नियुक्ति की नयी व्यवस्था लागू की गयी है. राज्य सरकार ने इसके लिए नयी संविदा नियुक्ति नियमावली जारी की है. इसमें पहली बार चिकित्सकों को आवेदन के दौरान अपनी पसंद का अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र चुनने और वहां सेवा देने के लिए ऑनलाइन मासिक मानदेय की बोली दर्ज करने का प्रावधान किया गया है.

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नयी व्यवस्था के तहत सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर अस्पतालवार बहाली की जायेगी. इससे धनबाद के एसएनएमएमसीएच, सदर अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी समेत राज्य के अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

अस्पतालवार रिक्तियों से शुरू होगी प्रक्रिया

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की अधिसूचना के अनुसार नियमित नियुक्ति होने तक चिकित्सकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों को संविदा पर नियुक्त किया जायेगा. सबसे पहले सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर एवं विशेषज्ञ के रिक्त पदों की सूची तैयार होगी. इसके बाद रिक्तियों के आधार पर अस्पतालवार विज्ञापन जारी किया जायेगा.

विज्ञापन जेएपी-आईटी के पोर्टल पर प्रकाशित किया जायेगा, जबकि इसकी संक्षिप्त सूचना समाचार पत्रों में दी जायेगी. आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. आवेदन के दौरान पात्र चिकित्सक अपनी पसंद का अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र चुन सकेंगे.

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पसंद का अस्पताल, फिर मानदेय की ऑनलाइन बोली

नयी नियमावली की सबसे अहम विशेषता ऑनलाइन मानदेय बोली है. चिकित्सक पहले अपनी पसंद का सरकारी स्वास्थ्य संस्थान चुनेंगे और इसके बाद वहां सेवा देने के लिए अपना अपेक्षित मासिक मानदेय ऑनलाइन दर्ज करेंगे.

नियमावली के अनुसार सामान्य चिकित्सक के लिए अधिकतम मासिक मानदेय 1.02 लाख रुपये और विशेषज्ञ चिकित्सक के लिए अधिकतम तीन लाख रुपये निर्धारित किया गया है. पात्र आवेदकों की सूची संबंधित संस्थान के लिए ऑनलाइन दर्ज की गयी मानदेय राशि के आधार पर तैयार की जायेगी.

बोली के आधार पर बनेगी चयन सूची

प्रत्येक संस्थान के लिए पात्र आवेदकों की ऑनलाइन दर्ज राशि के आधार पर सूची तैयार होगी. आरक्षित श्रेणी का निर्धारित कोटा पूरा करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर एल-1 के बाद एल-2, एल-3 और आगे के क्रम के आवेदकों को अवसर दिया जा सकेगा.

यदि दो या अधिक आवेदकों की बोली की राशि समान रहती है, तो डिग्री, अनुभव और जन्मतिथि जैसे निर्धारित मानकों के आधार पर वरीयता तय की जायेगी. चयनित चिकित्सक निर्धारित समय में योगदान नहीं करता है, तो अगले क्रम के पात्र आवेदक को मौका दिया जा सकेगा.

तीन वर्ष या नियमित नियुक्ति तक सेवा

संविदा नियुक्ति की अवधि तीन वर्ष या नियमित नियुक्ति होने तक होगी, इनमें जो पहले हो, वही मान्य होगा. तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद संतोषजनक प्रदर्शन की स्थिति में एक-एक वर्ष के लिए सेवा विस्तार दिया जा सकेगा. इसके लिए वित्त विभाग की सहमति आवश्यक होगी.

संविदा पर नियुक्त चिकित्सक भविष्य में नियमित नियुक्ति या अन्य सरकारी सेवा सुविधाओं पर किसी प्रकार का दावा नहीं कर सकेंगे.

एमबीबीएस से लेकर विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पात्रता

चिकित्सक पद के लिए एमबीबीएस डिग्री और वैध पंजीयन अनिवार्य रखा गया है. विशेषज्ञ चिकित्सक के पद के लिए एमडी, एमएस, डीएनबी या समकक्ष डिग्री अथवा डिप्लोमा की आवश्यकता होगी. दोनों श्रेणियों के लिए न्यूनतम आयु 23 वर्ष और अधिकतम आयु 64 वर्ष निर्धारित की गयी है.

चयन की अनुशंसा के लिए अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की गयी है.

निजी प्रैक्टिस पर भी रोक

संविदा पर नियुक्त चिकित्सक आवंटित अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र के दो किलोमीटर के दायरे में निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे. सरकारी आवास उपलब्ध होने पर उसमें रहना अनिवार्य होगा. सरकारी आवास उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में चिकित्सक को संबंधित अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र के तीन किलोमीटर के दायरे में रहना होगा.

नियमित बहाली तक मिलेगी अतिरिक्त मानव शक्ति

नयी व्यवस्था का उद्देश्य नियमित नियुक्ति में लगने वाले समय के दौरान सरकारी चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित होने से बचाना है. अस्पतालवार रिक्तियों के आधार पर बहाली होने से जिन संस्थानों में डॉक्टरों की अधिक जरूरत है, वहां उपलब्ध मानव संसाधन के अनुसार नियुक्ति की जा सकेगी.

पसंद का संस्थान चुनने और ऑनलाइन मानदेय बोली की व्यवस्था के जरिये नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया है. संविदा डॉक्टरों की उपलब्धता से नियमित नियुक्ति होने तक सरकारी अस्पतालों में मरीजों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में अतिरिक्त मानव संसाधन मिल सकेगा.

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