बोकारो, गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा के एच-1एन-1 सैंपल भी पहुंचेंगे SNMMCH, जल्द मिलेगी जांच रिपोर्ट

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सांकेतिक फोटो

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धनबाद के एसएनएमएमसीएच को पांच जिलों के एच-1एन-1 संदिग्ध मरीजों के सैंपल की आरटीपीसीआर जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है. जानें पूरी जानकारी.

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धनबाद. राज्य में एच-1एन-1 के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान और जांच की व्यवस्था मजबूत करने का निर्णय लिया है. इसके तहत शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच), धनबाद को पांच जिलों के एच-1एन-1 संदिग्ध मरीजों के सैंपल की आरटीपीसीआर जांच के लिए टैग किया गया है. अब धनबाद के अलावा बोकारो, गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा से लिये गये संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए एसएनएमएमसीएच भेजे जायेंगे.

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धनबाद में होगी पांच जिलों के एच-1एन-1 के संदिग्ध मरीजों के सैंपल की जांच
SNMMCH (फाइल फोटो)

स्वास्थ्य चिकित्सा, शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला ने राज्य के सभी राजकीय मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों और सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर जांच व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. संबंधित जिलों से एच-1एन-1 के संदिग्ध मामलों के नमूने निर्धारित मेडिकल कॉलेज में भेजकर आरटीपीसीआर जांच कराने को कहा गया है.

दूसरे केंद्रों पर निर्भरता होगी कम, जल्द मिलेगी रिपोर्ट

एसएनएमएमसीएच को धनबाद प्रमंडल के पांच जिलों से आने वाले एच-1एन-1 संदिग्ध मामलों की जांच की जिम्मेदारी दी गयी है. इससे जांच के लिए दूसरे केंद्रों पर निर्भरता कम होगी और रिपोर्ट मिलने में तेजी आने की उम्मीद है.

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स्वास्थ्य विभाग ने एसएनएमएमसीएच प्रबंधन को आरटीपीसीआर जांच सुविधा लगातार क्रियाशील रखने का निर्देश दिया है. इसके लिए पर्याप्त किट, रिएजेंट, तकनीकी कर्मियों और जरूरी मानव संसाधन की व्यवस्था रखने को कहा गया है, ताकि सैंपल की जांच में किसी तरह की परेशानी नहीं हो.

सैंपल भेजने में विलंब नहीं करने का निर्देश

संबंधित जिलों के सिविल सर्जनों को एसएनएमएमसीएच प्रबंधन के साथ समन्वय स्थापित कर सैंपल संग्रहण और परिवहन की व्यवस्था करने को कहा गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि सैंपल संग्रहण से लेकर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाने में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए.

जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित जिले को उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जायेगी. इससे संदिग्ध मरीजों की जांच और आगे के उपचार संबंधी निर्णय समय पर लिये जा सकेंगे.

छह मेडिकल कॉलेजों को जिलावार दी गयी जांच की जिम्मेदारी

राज्य के छह प्रमुख मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों को अलग-अलग जिलों से आने वाले सैंपल की जांच की जिम्मेदारी दी गयी है.

  • रिम्स, रांची: रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा और रामगढ़
  • मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज, पलामू: पलामू, गढ़वा और लातेहार
  • फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज, दुमका: दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज
  • शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग: हजारीबाग, कोडरमा और चतरा
  • एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां
  • एसएनएमएमसीएच, धनबाद: धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा

निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं और निदेशक चिकित्सा शिक्षा को पूरी व्यवस्था की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है. दोनों अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मेडिकल कॉलेजों में भेजे गये सभी सैंपल की जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी हो.

एच-1एन-1 क्या है, जानें इसके प्रमुख लक्षण

एच-1एन-1 इन्फ्लुएंजा ए वायरस का एक प्रकार है. यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाला संक्रामक संक्रमण है. संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या श्वसन स्राव के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है.

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इसके प्रमुख लक्षणों में अचानक बुखार या ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द तथा अत्यधिक थकान शामिल हैं. कुछ मरीजों, खासकर बच्चों में उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं. हालांकि, हर मरीज में बुखार होना जरूरी नहीं है.

संक्रमण से बचाव के लिए बरतें सावधानी

खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना चाहिए. हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से साफ करना जरूरी है. बीमारी की स्थिति में दूसरों के संपर्क में आने से बचें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतें.

एच-1एन-1 वायरल संक्रमण है, इसलिए उपचार डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाता है. जरूरत पड़ने पर चिकित्सक एंटीवायरल दवाएं दे सकते हैं. संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क कर जांच और उपचार संबंधी सलाह लेना उचित है.

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