आस्था से जुड़ा है श्रावणी मेला, खुले बाबा बैद्यनाथ व बासुकीनाथ मंदिर

Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 23 Jun 2020 1:56 AM

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बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकीनाथ मंदिर में दर्शन और श्रावणी मेला देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा है. यदि इस साल बाबा मंदिर नहीं खोला गया और कांवर यात्रा नहीं हुई, तो लाखों श्रद्धालुओं की अास्था को ठेस पहुंचेगा. इसलिए धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बाबा मंदिर खोलने और श्रावणी मेला लगाने का जल्द निर्णय लें.

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  • आस्था से जुड़ा है श्रावणी मेला, खुले बाबा बैद्यनाथ व बासुकीनाथ मंदिर

  • सांसद डॉ निशिकांत ने पत्र लिख सीएम हेमंत सोरेन से की मांग

देवघर : बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकीनाथ मंदिर में दर्शन और श्रावणी मेला देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा है. यदि इस साल बाबा मंदिर नहीं खोला गया और कांवर यात्रा नहीं हुई, तो लाखों श्रद्धालुओं की अास्था को ठेस पहुंचेगा. इसलिए धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बाबा मंदिर खोलने और श्रावणी मेला लगाने का जल्द निर्णय लें.

उक्त बातें गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने मुख्यमंत्री श्री सोरेन को भेजे पत्र में कहीं. उन्होंने सरकार से मांग की कि श्रावणी मेला से न सिर्फ लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना जुड़ा है, बल्कि देवघर से लेकर बिहार के कई जिलों की आर्थिक स्थिति इस मेला पर निर्भर है. किसी भी प्राकृतिक आपदा या महामारी में नहीं बंद हुआ मंदिर व न ही रुका कांवर मेलासांसद डॉ दुबे ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि आज तक के इतिहास में बाबा बैद्यनाथ मंदिर किसी भी महामारी या प्राकृतिक आपदा में बंद नहीं रहा है और न ही कांवर यात्रा रोकी गयी है.

सांसद ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि देवघर बाबा बैद्यनाथ मंदिर और बासुकीनाथ मंदिर में रोजाना पूजा और वार्षिक श्रावणी मेला विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भी अनिवार्य है. स्कंदपुराण, ब्रह्मपुराण, शिव पुराण और पद्म पुराण में बाबा बैद्यनाथ मंदिर की इस धार्मिक महत्ता का जिक्र है. इसलिए श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था बाबा बैद्यनाथ मंदिर से जुड़ी है और सालोंभर लोग मंदिर में दर्शन को आते रहे हैं. यही नहीं एक महीने तक चलने वाले विश्व के सबसे लंबे मेले में 105 किमी पैदल जल लेकर लोग मंदिर दर्शन के लिए आते हैं. हजारों सालों से चल रहे मेला को रोका गया तो श्रद्धालुओं की भावना आहत होगी.

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