'लोभ ही दुखों की खान', देवघर में जैन समाज ने समझाया उत्तम शौच धर्म का महत्व

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धैर्य, संतोष और धर्म को अपनाने का संदेश.| Prabhat Khabar Network

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देवघर में जैन समाज ने दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना की. पंडित ज्ञानचंद्र जैन ने समझाया कि लोभ के अभाव में ही शौच धर्म प्रकट होता है और अनंत इच्छाएं ही दुख का कारण बनती हैं. उन्होंने धैर्य, संतोष और धर्म अपनाने का संदेश दिया.

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संवाददाता, देवघर: दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन शनिवार को देवघर में जैन समाज की ओर से उत्तम शौच धर्म की आराधना की गयी. सुबह प्रथम अभिषेक और शांतिधारा के बाद सामूहिक आरती, पूजन समेत कई धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हुए. मंदिर परिसर में आरती, शास्त्रवाचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए.

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प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन

महापर्व के चौथे दिन प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य विनोद जैन, शीतल जैन, अखिलेश जैन और शांति प्रेस परिवार को प्राप्त हुआ. इसके बाद सामूहिक आरती और पूजन समेत अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए.

मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा. श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना में हिस्सा लिया.

लोभ के अभाव में ही प्रकट होता है शौच धर्म

शास्त्रवाचन के दौरान पंडित ज्ञानचंद्र जैन ने उत्तम शौच धर्म की व्याख्या की. उन्होंने कहा कि लोभ के पूर्ण अभाव में ही शौच धर्म प्रकट होता है. जहां लोभ नहीं है, वहीं वास्तविक शौच धर्म है.

उन्होंने कहा कि लोभ मनुष्य को असंतोष की ओर ले जाता है. जैसे-जैसे मनुष्य की तृष्णा बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे संतोष उससे दूर होता जाता है.

अनंत इच्छाएं ही अनंत दुख का कारण

पंडित जैन ने कहा कि सुखी रहने के लिए मनुष्य को अपनी इच्छाओं पर अंकुश लगाना चाहिए. अनंत इच्छाएं ही अनंत दुख का कारण बनती हैं.

उन्होंने कहा कि मनुष्य धन-संपत्ति कितनी भी अर्जित कर ले, लेकिन मृत्यु के समय कुछ भी साथ नहीं जाता. इसलिए जो मिला है, उसमें संतोष रखते हुए धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए.

धैर्य और संतोष से सार्थक होगा जीवन

पंडित ज्ञानचंद्र जैन ने जीवन की नश्वरता का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन दीपक की ज्योति के समान है, जो कब बुझ जाए, इसका पता नहीं. उन्होंने लोभ को दुखों की खान बताते हुए धैर्य, संतोष और धर्म को अपनाने का संदेश दिया.

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बड़ी संख्या में समाज के लोग हुए शामिल

कार्यक्रम में झारखंड राज्य दिगंबर जैन धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष ताराचंद जैन, जैन मंदिर अध्यक्ष राजेश जैन, मंत्री सुरेश पाटनी और कोषाध्यक्ष जुगल किशोर जैन समेत बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे.

एक नजर में

  • दशलक्षण महापर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की आराधना.
  • प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का आयोजन.
  • सामूहिक आरती और पूजन में शामिल हुए श्रद्धालु.
  • शास्त्रवाचन में लोभ, संतोष और धर्म पर चर्चा.
  • पंडित ज्ञानचंद्र जैन ने दिया सदाचार का संदेश.
  • बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग कार्यक्रम में रहे मौजूद.

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