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नौ साल में वज्रपात से 1568 लोगों की मौत

Updated at : 25 Jul 2019 3:26 AM (IST)
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नौ साल में वज्रपात से 1568 लोगों की मौत

पांच माह में 48 मौतें झारखंड में पिछले नौ साल में वज्रपात से 1568 लोगों की मौत हुई है. राज्य में संताल परगना का इलाका सबसे अधिक प्रभावित है. पिछले पांच सालों में संताल परगना में वज्रपात से 48 लोगों की मौत हुई है. सबसे अधि मौतें दुमका और जामताड़ा में हुई हैं. प्रदेश में […]

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पांच माह में 48 मौतें

झारखंड में पिछले नौ साल में वज्रपात से 1568 लोगों की मौत हुई है. राज्य में संताल परगना का इलाका सबसे अधिक प्रभावित है. पिछले पांच सालों में संताल परगना में वज्रपात से 48 लोगों की मौत हुई है. सबसे अधि मौतें दुमका और जामताड़ा में हुई हैं. प्रदेश में वज्रपात को राज्य सरकार ने विशिष्ट आपदा घोषित कर रखा है. पीड़ितों के लिए मुआवजे का प्रावधान भी है. लेकिन वज्रपात से बचाव और समय पर लोगों को सूचना देने का तंत्र अब भी नाकाफी है. राज्य बनने के 19 साल होने को है, लेकिन अभी तक मौसम की सटीक सूचना एकत्र करने के लिए डॉपलर रडार तक स्थापित नहीं किया गया है.

बारिश में क्या करें और क्या न करें

  • वज्रपात के दौरान मजबूत छत वाली इमारतों के नीचे रहें
  • घरों की छतों पर तड़ित चालक लगवायें
  • टेलीफोन या बिजली के खंभे के आसपास न रहें
  • पानी का नल, फ्रिज, टेलीफोन, मोबाइल, टीवी या अन्य किसी तरह के बिजली के उपकरण का उपयोग नहीं करें
  • यदि दो पहिया वाहन, साइकिल, ट्रक, ट्रैक्टर और नौका आदि पर सवार हों, तो तुरंत उतरकर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं.वज्रपात के दौरान वाहनों पर सवारी करने से बचें
  • टेलीफोन व बिजली के पोल के अलावा टेलीफोन और टेलीविजन के टावर से दूर रहें
  • वृक्षों, दलदल वाले स्थानों और जलस्रोतों से दूर रहने की कोशिश करें
  • खुले आकाश में रहने से अच्छा है कि छोटे पेड़ों के नीचे रहें
  • गीले खेतों में हल चलाने या रोपनी करने वाले किसान और मजदूर सूखे स्थानों पर चले जायें
  • ऊंचे पेड़ के तनों या टहनियों में तांबे का एक तार स्थापित कर जमीन में काफी गहराई तक दबा दें ताकि पेड़ सुरक्षित हो जाये
  • खेत-खलिहान में काम कर रहे हैं अौर वज्रपात के दौरान सुरक्षित स्थान पर नहीं जा पा रहे हैं, तो पैरों के नीचे सूखी चीजें जैसे लकड़ी, प्लास्टिक और बोरा में से कोई एक अपने पैरों के नीचे रख लें. दोनों पैर को आपस में सटा लें. दोनों हाथों को घुटने पर रखकर अपने सिर को जमीन की तरफ यथासंभव झुका लें और सिर को जमीन से नहीं छुआएं. ना ही जमीन पर लेटें
  • तैराकी कर रहे लोग और मछुआरे अविलंब पानी से बाहर आ जायें
  • यदि आप जंगल में हैं, तो बौने (कम ऊंची पेड़) और घने पेड़ों के नीचे चले जायें
  • बिजली की चमक देख आैर गड़गड़ाहट की आवाज सुनकर ऊंचे और सिंगल पेड़ के नीचे न जायें
  • घरों की छतों पर तड़ित चालक लगवायें
  • टेलीफोन या बिजली के खंभे के आसपास न रहें
  • पानी का नल, फ्रिज, टेलीफोन, मोबाइल, टीवी या अन्य किसी तरह के बिजली के उपकरण का उपयोग नहीं करें
  • यदि दो पहिया वाहन, साइकिल, ट्रक, ट्रैक्टर और नौका आदि पर सवार हों, तो तुरंत उतरकर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं.वज्रपात के दौरान वाहनों पर सवारी करने से बचें
  • टेलीफोन व बिजली के पोल के अलावा टेलीफोन और टेलीविजन के टावर से दूर रहें
  • वृक्षों, दलदल वाले स्थानों और जलस्रोतों से दूर रहने की कोशिश करें
  • खुले आकाश में रहने से अच्छा है कि छोटे पेड़ों के नीचे रहें
  • गीले खेतों में हल चलाने या रोपनी करने वाले किसान और मजदूर सूखे स्थानों पर चले जायें
  • ऊंचे पेड़ के तनों या टहनियों में तांबे का एक तार स्थापित कर जमीन में काफी गहराई तक दबा दें ताकि पेड़ सुरक्षित हो जाये
  • खेत-खलिहान में काम कर रहे हैं अौर वज्रपात के दौरान सुरक्षित स्थान पर नहीं जा पा रहे हैं, तो पैरों के नीचे सूखी चीजें जैसे लकड़ी, प्लास्टिक और बोरा में से कोई एक अपने पैरों के नीचे रख लें. दोनों पैर को आपस में सटा लें. दोनों हाथों को घुटने पर रखकर अपने सिर को जमीन की तरफ यथासंभव झुका लें और सिर को जमीन से नहीं छुआएं. ना ही जमीन पर लेटें
  • तैराकी कर रहे लोग और मछुआरे अविलंब पानी से बाहर आ जायें
  • यदि आप जंगल में हैं, तो बौने (कम ऊंची पेड़) और घने पेड़ों के नीचे चले जायें
  • बिजली की चमक देख आैर गड़गड़ाहट की आवाज सुनकर ऊंचे और सिंगल पेड़ के नीचे न जायें
  • देवघर : संताल परगना में वज्रपात भारी आपदा के रूप में उभर कर सामने आया है. पूरे प्रमंडल में हर साल कई लोगों की वज्रपात से मौत हो रही है. एक आंकड़े के अनुसार, इस साल सिर्फ पांच माह में संताल परगना में 48 लोगों की मौत ठनका गिरने से हो चुकी है. सैकड़ों की संख्या में पशु भी मारे गये हैं.
  • सबसे ज्यादा दुमका में पांच माह में 13 लोगों की जानें गयी हैं. इस जिले में पिछले डेढ़ सालों में 24 लोगों की जान वज्रपात ने ली है. जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राजू कुमार महतो के मुताबिक पिछले साल वज्रपात से 11 लोगों की मौत के मामले आये थे, जिनमें आवश्यक पहल करते हुए मुआवजे की रकम के भुगतान के लिए संबंधित अंचलों को राशि हस्तांतरित की जा चुकी है. देवघर में छह लोगों की मौत हो चुकी है.
  • इसी तरह गोड्डा के अलग-अलग प्रखंडों में पिछले चार माह में छह लोगों की मौत ठनका गिरने से हो चुकी है. गोड्डा, पोड़ैयाहाट व मेहरमा में दो-दो लोगों की जान गयी है. इनमें पांच की मौत जून और जुलाई माह में हुई है. जुलाई में बोआरीजोर में वज्रपात से सात मवेशियों की मौत हुई है. साहिबगंज में ठनके ने पिछले पांच माह में आठ लोगों की मौत हुई है. करीब 10 से अधिक लोग घायल हुए हैं. जिले में वज्रपात से हाल के दिनों में पांच पशुओं की भी जान गयी है.
  • इसी तरह पाकुड़ में एक माह में तीन लोगों की मौत हो चुकी है. जामताड़ा में भी पिछले पांच माह में वज्रपात से 12 लोगों की मौत की सूचना है. बुधवार को ही छह लोग वज्रपात में अपनी जान गंवा बैठे हैं. जामताड़ा जिले में पिछले पांच वर्षों में वज्रपात से करीब 54 लोगों की मौत हुई है. आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वित्तीय वर्ष 2017-18 में सबसे अधिक 13 लोगों की मौत हुई हैं.
  • जानकार बताते हैं कि वज्रपात के लिहाज से झारखंड काफी संवेदनशील है. यहां पर वज्रपात की घटनाएं समतली इलाकों की तुलना में अधिक होती है. समुद्र तल से झारखंड के अधिक ऊंचाई पर होने व पठारी और जंगली क्षेत्रों में विशेषकर जहां जमीन की ऊंचाई में अचानक अंतर आता है.
  • बादल के वाष्प कण आपस में टकरा कर अत्यधिक ऊर्जा का सृजन करते हैं, जो कि खनिज भूमि की ओर आकर्षित होकर वज्रपात का रूप धारण कर लेते हैं. छोटी पहाड़ियां, लंबे पेड़, जंगल, दलदली क्षेत्र, ऊंचे टावर और बड़ी इमारतें वज्रपात के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील होते हैं. वज्रपात मई से जून और सितंबर से नवंबर में अधिक होता है. जानकारों के अनुसार वज्रपात पूर्वाहन की तुलना में अपराह्न में ज्यादा होता है. इसके लिए गर्म हवा में आर्द्रता एवं अस्थिर वायुमंडलीय अवस्था वैसे बादलों के बनने में सहायक है जिससे वज्रपात की संभावना रहती है.
  • जामताड़ा के कुसमापहाड़ी में मचा कोहराम
  • जामताड़ा : बुधवार को बारिश के साथ वज्रपात की घटना में जिले में छह लोगों की मौत हो गयी है. जबकि एक युवक घायल हो गया है़ घायल का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है. सबसे हृदय विदारक घटना जामताड़ा थाना क्षेत्र के कुसमापहाड़ी गांव की है. जहां दो सगे भाई सहित कुल पांच लोगों की मौत वज्रपात से हो गयी है़ जबकि एक युवक बुरी तरह जख्मी हो गया है़ वहीं दूसरी घटना बिंदापाथर थाना क्षेत्र की है. जहां एक 55 वर्षीय वृद्धा की मौत वज्रपात से हो गयी है.
  • घटना दोपहर लगभग 12.30 की है़ जानकारी के अनुसार सभी लोग दोपहर में जोरिया की ओर गये थे. इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गयी और बादल गरजने लगे. सभी लोग पुल के नीचे छिप गये थे. इसी बीच हुई वज्रपात की चपेट में सभी लोग आ गये. जिसमें चार लोगों की मौत घटनास्थल पर ही हो गयी. जबकि एक ने अस्पताल लाने के क्रम में रास्ते में दम तोड़ दिया. वज्रपात की घटना में कुसुमापहाड़ी गांव निवासी सगे भाई रूपलाल हेंब्रम (20 वर्ष), इंद्रसेन हेंब्रम (16 वर्ष), संजय हेंब्रम (9 वर्ष), सुनील हेंब्रम (19 वर्ष), नवाई कोल निवासी परिमल हेंब्रम (35 वर्ष). जबकि सर्जन सोरेन (16 वर्ष) घटना में घायल हो गये.
  • देवघर में वज्रपात से एक की मौत, तीन जख्मी
  • देवघर : जिले के दो अलग-अलग थाना क्षेत्र में बुधवार को हुए वज्रपात की घटना में एक युवक की मौत सहित तीन लोग जख्मी हो गये. पहली घटना जसीडीह थाना क्षेत्र के डुमरागादी गांव में हुई. जब बारिश के दौरान गांव के एक स्कूल के समीप कुछ युवक बारिश से बचने के लिए खड़े थे. इस बीच डुमरागादी गांव स्थित अपने मामा घर घूमने आये बुल्लु वर्मा (19) अचानक से तेज गर्जन के साथ वज्रपात होने से बेहोश होकर गिर पड़ा.
  • परिजनों व स्थानीय लोगों की मदद से उसे टैंपों में लेकर सभी सदर अस्पताल पहुंचे. जहां ऑन ड्यूटी चिकित्सक डॉ बीपी सिंह ने युवक को मृत घोषित करते हुए बैद्यनाथधाम ओपी को मामले से अवगत करा दिया. बाद में ओपी प्रभारी ने लाश का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. बाद में बुल्लु के परिजन पोस्टमार्टम के बाद लाश को लेकर उसके पैतृक घर सारवां प्रखंड के भंडारो गांव लेकर चले गये. दूसरी घटना देवीपुर थाना क्षेत्र के मुंडामुंडी गांव में घटी.
  • जब खेतों में रोपनी के काम में जुटी दो महिला सहित एक पुरूष वज्रपात के झटके से खेत में ही गश खाकर गिर पड़े. घटना में बड़की देवी(50) पति गुड़ा सोरेन, मकु किस्कू(37) पति रामलाल हांसदा व हरि मरांडी(25) शामिल हैं. स्थानीय लोगों की मदद से उन सभी को इलाज के लिए सदर अस्पताल पहुंचाया गया. जहां चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है. घटना के संदर्भ में मकु के दामाद मोहनलाल मरांडी ने बताया कि सभी लोग गांव में खेत में रोपनी का काम कर रहे थे. अचानक से बारिश के साथ वज्रपात की आवाज आयी. तभी पास के खेत में काम कर रहे सभी बेहोश होकर गिर पड़े.
  • चार लाख तक है मुआवजे का प्रावधान
  • वज्रपात से एक व्यक्ति की मौत पर उनके आश्रित को चार लाख का मुआवजा
  • प्रति घायल को 4300 से अधिकतम दो लाख रुपये तक (घायल की स्थिति के अनुरूप)
  • कच्चा या पक्का घर के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर प्रति मकान 95,100 रुपये
  • झोपड़ियों की क्षति पर प्रति झोपड़ी 2,100 रुपये
  • दुधारू गाय, भैंस की मौत पर प्रति पशु 30 हजार रुपये
  • बैल, भैंसा जैसे पशु की मौत पर प्रति पशु 25 हजार रुपये
  • भेड़ व बकरी सहित अन्य की मौत पर प्रति पशु तीन हजार रुपये
  • कैसे लें मुआवजा
  • वज्रपात से प्रभावित व्यक्ति या संपत्ति के मुआवजे का भुगतान के लिए प्राथमिकी (एफआइआर) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का होना आवश्यक है. इसके अलावा अंचल अधिकारी या जिले के आपदा प्रबंधन अधिकार या उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर मुआवजा या राहत के लिए अविलंब संपर्क करना चाहिए. तभी समय पर मुआवजे का भुगतान हो सकेगा.
  • मोबाइल एप से वज्रपात की सूचना देने की तैयारी
  • आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की तर्ज पर अब झारखंड में भी मोबाइल एप के जरिये वज्रपात होने की सूचना 35 से 45 मिनट पहले मिल सकती है. इसकी तैयारी की जा रही है. अांध्र प्रदेश में एप का नाम वज्रपात है और कर्नाटक में सिडरू है. यह एप वज्रपात से 45 मिनट पहले लाखों लोगों को एक साथ मोबाइल पर अलर्ट दे देता है. इसे जुलाई 2017 में लांच किया गया था. इसको चितुर के कुप्पम इंजीनियरिंग कॉलेज ने भारतीय अंतरक्षि अनुसंधान संगठन के साथ मिलकर तैयार किया था.
  • वज्रपात से प्रभावित व्यक्ति या संपत्ति के मुआवजे का भुगतान के लिए प्राथमिकी (एफआइआर) और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का होना आवश्यक है. इसके अलावा अंचल अधिकारी या जिले के आपदा प्रबंधन अधिकार या उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर मुआवजा या राहत के लिए अविलंब संपर्क करना चाहिए. तभी समय पर मुआवजे का भुगतान हो सकेगा.
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