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बारातरी गांव में सड़क व पुल की सुविधा नहीं

Updated at : 13 Jun 2025 8:10 PM (IST)
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बारातरी गांव में सड़क व पुल की सुविधा नहीं

हुरनाली पंचायत के पहाड़ व जंगलों के बीच बसा बारातरी गांव में शुक्रवार को प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन हुआ.

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सिमरिया. हुरनाली पंचायत के पहाड़ व जंगलों के बीच बसा बारातरी गांव में शुक्रवार को प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन हुआ. यहां लोगो ने खुलकर क्षेत्र की समस्याओं को रखा. यहां के लोग आज भी कई मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं. गांव तक आने-जाने के लिए सड़क नहीं है. पगडंडी के सहारे लोग आवागमन करते हैं. गांव की आबादी 300 है. यह गांव गंझू जाति बहुल है. लोग खेतीबारी कर जीविकोपार्जन करते हैं. जिस सड़क पर लोग आवागमन करते हैं, उसमें तीन नदियां हैं. एक नदी पर पुल है. दो नदी पर पुल नहीं रहने से बरसात के दिनों में आवागमन ठप हो जाता है. बरसात में बीमार पड़ने पर परिजन खाट पर लाद अस्पताल ले जाते हैं. इसके अलावा लोगों को हर घर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. गांव में लगा जलमीनार एक साल से खराब है. कुएं का जलस्तर भी नीचे चला गया है. लोग गंदा पानी पीकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं. गांव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है. तीन किमी दूर हांडे गांव की आंगनबाड़ी में जाना पड़ता है.

पुल नहीं बनने से होती है परेशानी: खिरोधर

खिरोधर गंझू ने कहा कि नदी में पर पुल नहीं बनने से बरसात के दिनों में परेशानी होती है. नदी में बाढ़ आने से आवागमन बंद हो जाता है. लोगों को गांव में ही सिमटकर रहना पड़ता है. बच्चे विद्यालय नहीं जा पाते हैं. बीमार लोगों को इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जा पाते हैं.

पगडंडी रास्ता से आना-जाना करते हैं: कामेश्वर

कामेश्वर गंझू ने कहा कि सड़क नहीं होने के कारण जंगल के पगडंडी रास्ता से आने जाने को मजबूर है. सड़क के अभाव में गांव तक चारपहिया वाहन भी नहीं पहुंच पाता है. पैदल, साइकिल व बाइक से आना-जाना होता है. सड़क नहीं रहने से रिश्तेदार कतराते हैं.

सिंचाई की सुविधा नही है: नारायण

नारायण गंझू ने कहा कि गांव में पेयजल की सुविधा नही है. कुएं का पानी से प्यास बुझाते हैं. एक भी चापानल नहीं है. जलमीनार बेकार पड़ा हुआ है. सिंचाई का भी कोई सुविधा नहीं है. बरसात के पानी पर ही आश्रित रहना पड़ता है.

खुले में जाना पड़ता है शौच: गीता देवी

गीता देवी ने कहा कि शौचालय का सुविधा नही रहने के कारण खुले में शौच करने के लिए जाना पड़ता है. पांच छह साल पहले बना शौचालय जर्जर हो गया है. प्लास्टर टूट-टूट कर गिरता रहता है. प्रशासन से शौचालय की मरम्मति कराने की मांग की.

आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है: गुड़िया देवी

गुड़िया देवी ने कहा कि गांव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है. जिससे बच्चो को पढ़ने के लिए तीन दूर आंगनबाड़ी केंद्र भेजना पड़ता है. जिससे काफी परेशानी होती है. गांव में आंगनबाड़ी केंद्र होता तो गांव के सभी बच्चे केंद्र में जाने में आसानी होती.

क्या कहते हैं मुखिया

मुखिया पूरन राम ने कहा कि गांव के लोगो को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से लाभांवित किया जा रहा है. गांव की समस्या दूर करने का प्रयास कर रहा हुं. कहा कि गांव की समस्या से जिला प्रशासन से अवगत करा कर समाधान कराया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANUJ SINGH

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By ANUJ SINGH

ANUJ SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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