आमकुदर के शहीदों को दी श्रद्धांजलि, वनपट्टा और जमीन के मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी

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कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि व अन्य | Prabhat Khabar Network

भाकपा माले ने आमकुदर के शहीदों का 29वां शहादत दिवस मनाया. कार्यक्रम में वन अधिकार और भूमिहीनों के हक के लिए बड़े आंदोलन का संकल्प लिया गया.

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कान्हाचट्टी. प्रखंड के शहीद चौक बेंगोकला में रविवार को भाकपा माले की ओर से 29वां शहादत दिवस सह श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान झंडोत्तोलन कर आमकुदर के शहीदों के स्मारक पर माल्यार्पण किया गया. इसके बाद एक मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाकपा माले के राज्य कमेटी सदस्य सह चतरा प्रभारी भुवनेश्वर बेदिया शामिल हुए.

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अध्यक्षता जिला सचिव मनोज कुमार प्रजापति ने की, जबकि संचालन रूपलाल सिंह भोगता ने किया. मुख्य अतिथि ने कहा कि वनों पर अधिकार के लिए तत्कालीन हजारीबाग जिला व वर्तमान चतरा जिले में सैकड़ों साथियों ने जेल भरो आंदोलन किया था. इसके बाद केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने वन अधिकार अधिनियम-2006 लागू किया. इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में लोगों को वनपट्टा नहीं मिल पा रहा है.

आदिम जनजाति वर्ग के कुछ लोगों को पट्टा मिला भी है, तो कई मामलों में महज दो-चार डिसमिल जमीन दी गयी है, जो उनके लिए पर्याप्त नहीं है. उन्होंने केंद्र सरकार एमएमडीआर विधेयक के माध्यम से राज्यों के बकाया व विकास प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. एसआईआर के माध्यम से गरीब व अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों को मतदाता सूची से हटाने व परेशान की जा रही है. जिला सचिव ने कहा कि पूर्व की केंद्र सरकार के समय भूमिहीनों को काफी संघर्ष के बाद जमीन का पर्चा मिला था. उन्होंने लैंड बैंक से जमीन रिलीज कर रसीद निर्गत करने व ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में गड़बड़ियों को पंचायत स्तर पर शिविर लगाकर सुधारने की मांग की.

उन्होंने कहा कि जिले की मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए अन्य संगठनो के साथ मिल कर आंदोलन चलाया जायेगा. मौके पर झारखंड राज्य विद्यालय रसोइया संघ के जिला प्रभारी विजय गिरी, इंकलाबी नौजवान सभा के जिला सचिव आशीष कुमार प्रजापति, सुंदर भारती, सुरेंद्र यादव, मंजू देवी, जयंती देवी, रितलाल सिंह भोगता, लखन पासवान, फुलेश्वर सिंह, गोविंद सिंह, सुरेंद्र भारती, शंकर कुमार राम समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे. मालूम हो कि छह सितंबर 1997 को सामंती ताकतों द्वारा भाकपा माले के झमन सिंह भोगता समेत 11 लोगों की हत्या कर दी गयी थी. इन्हीं शहीदों की स्मृति में प्रत्येक वर्ष शहादत दिवस मनाया जाता है.

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