75% अंक वालों को रिसर्च का मौका, कोल्हान विवि में यूजी सिस्टम बदला

कोल्हान विश्वविद्यालय ने स्नातक सातवें सेमेस्टर में दाखिले के लिए दो नई श्रेणियां बनाई हैं. रिसर्च विथ ऑनर्स और सामान्य स्नातक की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें.
कोल्हान विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के लिए नयी शिक्षा नीति के साथ बफर सिस्टम लागू कर दिया है. विश्वविद्यालय मुख्यालय में हुई बैठकों के बाद हुए निर्णय के तहत अब छात्र 3 वर्षीय या 4 वर्षीय स्नातक कोर्स का चयन कर सकेंगे. चार वर्षीय स्नातक के सातवें सेमेस्टर में नामांकन के लिए दो श्रेणियां बनायी गयी हैं. जिन विद्यार्थियों को छठे सेमेस्टर में 75 प्रतिशत या अधिक अंक मिले हैं, वे रिसर्च विथ ऑनर्स के विकल्प के साथ सातवें सेमेस्टर में प्रवेश लेंगे.
जिन्हें 75 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं हुए हैं वे सामान्य स्नातक के रूप में आगे की पढ़ाई करेंगे. दोनों श्रेणियों के छात्रों को एक वर्ष का पीजी कोर्स करने का अवसर मिलेगा. रिसर्च विथ ऑनर्स वाले छात्र एक साल के पीजी के बाद सीधे पीएचडी के लिए पात्र होंगे, जबकि सामान्य स्नातक वाले विद्यार्थियों को पीएचडी में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी.
नामांकन में गिरावट से तीन बार बढ़ी तिथि
कोल्हान विवि से जुड़ें कॉलेजों में फर्स्ट और सातवें सेमेस्टर की कक्षाओं के लिए 3 अगस्त से पढ़ाई शुरू होनी है. 31 जुलाई तक नामांकन की तिथि तय थी. हालांकि, कम रुझान के चलते तिथि तीन बार बढ़ानी पड़ी है. आसपास के कॉलेजों के छात्र पारंपरिक दो वर्षीय पीजी कोर्स के प्रति अधिक आकर्षित हैं, जिससे सातवें सेमेस्टर में नामांकन का ग्राफ गिर रहा है.
शिक्षकों की कमी ने बढ़ायी चिंता
दरअसल, स्थायी पीएचडी शिक्षकों की कमी के कारण कई कॉलेजों में पीजी और रिसर्च की पढ़ाई सीमित हो गयी है. इसका उदाहरण महिला कॉलेज चाईबासा है, जहां विज्ञान में पीजी नहीं है और आर्ट्स में केवल हिंदी व इतिहास विषय ही उपलब्ध हैं. विश्वविद्यालय इस समस्या के समाधान के प्रयास में जुटा है.
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