बोकारो स्टील सिटी के सेक्टरों में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, बच्चों और राहगीरों की बढ़ी चिंता

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सड़क पर कब्जा जमाए स्ट्रीट डॉग | Prabhat Khabar Network

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बोकारो स्टील सिटी के विभिन्न सेक्टरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब एक गंभीर जनसमस्या बन गई है. बच्चों की सुरक्षा, राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है, जिससे लोगों में भय का माहौल है. स्थानीय निवासी जल्द से जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.

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बोकारो. स्टील सिटी के विभिन्न सेक्टरों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब गंभीर जनसमस्या का रूप लेती जा रही है. आवासीय इलाकों, पार्कों और मुख्य सड़कों पर दिनभर स्ट्रीट डॉग घूमते नजर आते हैं, जबकि शाम होते ही कई स्थानों पर इनके झुंड सड़कों और गलियों में सक्रिय हो जाते हैं. इससे पैदल चलने वालों, बच्चों, बुजुर्गों तथा दोपहिया वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गयी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुत्तों के दौड़ाने और काटने की घटनाओं के कारण लोगों में भय का माहौल बन रहा है.

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बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

स्थानीय निवासियों के अनुसार सबसे अधिक चिंता छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर है. आवासीय परिसरों और कॉलोनियों में खेलने वाले बच्चों पर अभिभावकों को लगातार नजर रखनी पड़ रही है. कई परिवारों का कहना है कि बच्चे बाहर खेलने की इच्छा जताते हैं, लेकिन आवारा कुत्तों के झुंड के कारण उन्हें अकेले भेजना सुरक्षित नहीं लगता. लोगों का कहना है कि यह समस्या किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई हिस्सों में समान स्थिति बनी हुई है.

बाइक और साइकिल सवारों के लिए भी बढ़ा जोखिम

शाम और रात के समय ड्यूटी से लौटने वाले बीएसएलकर्मियों तथा अन्य राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई लोगों ने बताया कि बाइक या साइकिल गुजरते ही कुत्ते पीछे दौड़ने लगते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है. मुख्य मार्गों पर झुंड में बैठे कुत्तों के कारण वाहन चालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है. सड़क किनारे कारोबार करने वाले दुकानदार भी इस समस्या से प्रभावित हैं.

स्थानीय लोगों ने उठायी स्थायी समाधान की मांग

सेक्टर-8डी न्यू की निवासी वी शेखर ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है. उनके अनुसार कई बार बच्चे कुत्तों के हमले से बाल-बाल बचे हैं. वहीं सेक्टर-12बी के एक बीएसएलकर्मी ने कहा कि रात में ड्यूटी से लौटते समय कुत्तों के पीछे दौड़ने से दुर्घटना का खतरा बना रहता है. स्थानीय लोगों ने संबंधित एजेंसियों से आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है.

कुत्ता काटने पर तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह

मुस्कान अस्पताल के प्रबंधक डॉ मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कुत्ते के काटने या खरोंचने पर संक्रमण का खतरा रहता है. उन्होंने बताया कि रैबीज एक गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा बीमारी है, इसलिए किसी भी डॉग बाइट की घटना को हल्के में नहीं लेना चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि कुत्ता काटने पर घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए तथा बिना देरी चिकित्सक से संपर्क कर आवश्यक उपचार और टीकाकरण कराना चाहिए.

बढ़ती समस्या पर समन्वित पहल की जरूरत

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण से जुड़ा विषय है. ऐसे में संबंधित विभागों, स्थानीय निकायों और नागरिकों के समन्वित प्रयास से ही समस्या का दीर्घकालिक समाधान संभव हो सकेगा.

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