Jharkhand News : झारखंड का एक गांव, जहां बरसात में हफ्तों कैद हो जाती है लोगों की जिंदगी

बरसात के दिनों में बाढ़ आने पर ग्रामीण रस्सी के सहारे नदी पार करते हैं, जो काफी जोखिम भरा होता है. तमाम दावे के बावजूद लोगों की जिंदगी बरसात में कैद हो जाती है. नदी पार करने में बह जाने से एक महिला की मौत भी हो गयी है, लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली.
Jharkhand News, बोकारो न्यूज (नागेश्वर) : झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत जिनगा व अमन पहाड़ की तलहटी में बसी चुटे पंचायत में उग्रवाद प्रभावित संताली गांव जमुवावेड़ा दो नदियों के बीच बसा है. निकट के गांव खर्चावेड़ा के ग्रामीण नदी में पुल नहीं रहने से बरसात के दिनों में बाढ़ आने पर ग्रामीणों की जिंदगी हफ्तों कैद हो जाती है. आवागमन पूर्ण रूप से ठप हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि जीवन तो किसी प्रकार जी लेते हैं, लकिन गांव के दोनों छोर पर नदी है और एक ओर पहाड़ से घिरा है. पुल नहीं होने से आवागमन में काफी परेशानी होती है.
आजादी के सात दशक और झारंखड बनने के दो दशक बाद भी इस नक्सल प्रभावित गांव के लोग कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं. गांव जाने के लिये रास्ता नहीं है. जिसके चलते गांव में विकास कार्य ठीक से नहीं हो पा रहा है. जमुवावेड़ा के ग्रामीणों का कहना है कि इन क्षेत्रों में सरकारी अधिकारियों का आवागमन नहीं के बराबर होता है. सिर्फ पुलिस इस क्षेत्र में सर्च अभियान में आती है जबकि चुटे पंचायत विकास के मायने में झुमरा एक्शन प्लान से जुड़ा हुआ है.
Also Read: झारखंड के इस जोड़ा शिवलिंग पर चढ़ाते हैं ‘पाताल गंगा’ का जल, तीन फुट के कुएं से निकलता रहता है पानीजमुवावेड़ा गांव में 30 संताली परिवार निवास करते हैं. गांव में कई वर्षों पूर्व सरकारी स्तर से दो कुप बने हैं तथा पूर्व मुखिया मो रियाज के द्वारा 2011-12 में ग्रामीणों की बैठने के लिए एक चबूतरा व पीसीसी पथ का निर्माण किया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पुल निर्माण कराने के लिये कई दफा अधिकारी आये पर जानकारी लेने के बाद दोबारा नहीं आए. ग्रामीणों ने बताया कि दो वर्ष पूर्व एक महिला नदी पार कर रही थी. उसी दौरान वह बह गयी थी. इस हादसे के बाद भी किसी ने सुध नहीं ली.
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जमुवावेड़ा के सटे खर्चावेड़ा गांव है, वहां सभी संताली परिवार (सोरेन परिवार) के लोग निवास करते हैं. सभी दिशोम गुरू व पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की दुहाई देते नहीं थकते. उन्हें पूरा उम्मीद है कि गुरूजी संताली परिवारों की सुध लेंगे. खर्चावेड़ा गांव के निकट नदी है. दूसरे गांव जाने के लिये बरसात के दिनों में बाढ़ आने पर रस्सी के सहारे नदी पार करते हैं, जो काफी जोखिम भरा होता है. चुटे पंचातय की मुखिया लता देवी का कहना है कि दो कूप का निर्माण किया गया है. प्रधानमंत्री आवास भी दिया गया है. 15वें वित्त आयोग में पीसीसी पथ का निर्माण कराया जायेगा. पूर्व मुखिया मो रियाज, सामाजिक कार्यकर्ता लालमोहन सिंह भोक्ता के अलावा जमुवावेड़ा के राजेश मुर्मू, महेन्द्र मुर्मू, जुनूश मुर्मू, करमा वास्के व खर्चावेड़ा के बबन मांझी, सुखराम मांझी, महादेव मांझी, श्याम लाल मांझी एवं राजू मांझी ने जमुवावेड़ा व खर्चावेड़ा में पुल निर्माण की मांग की है.
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