बोकारो-रायपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: 15 घंटे का सफर घटकर होगा आधा, जानें कैसे बढ़ेगी रफ्तार

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रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना बोकारो और धनबाद को छत्तीसगढ़ से जोड़ेगी. इस 707 किमी लंबे कॉरिडोर से यात्रा का समय आधा हो जाएगा और औद्योगिक माल की आवाजाही तेज होगी. यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगी.

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धनबाद/बोकारो. छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों को झारखंड के प्रमुख खनिज और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ने वाली रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना से बोकारो और धनबाद को भी लाभ मिलने की उम्मीद है. करीब 707 किमी लंबे इस सड़क कॉरिडोर का उद्देश्य औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों के बीच संपर्क को बेहतर करना तथा कोयला, इस्पात और अन्य खनिजों के परिवहन को अधिक सुगम बनाना है. कॉरिडोर के विकसित होने से बोकारो-धनबाद क्षेत्र से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इलाकों तक सड़क संपर्क मजबूत होने की संभावना है.

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छत्तीसगढ़ में कई बड़े थर्मल पावर प्लांट के अलावा निजी स्पंज आयरन और स्टील इकाइयां संचालित हैं. इन उद्योगों को लगातार बड़ी मात्रा में कोयले की जरूरत होती है. झारखंड के बोकारो और धनबाद क्षेत्र से भी इन औद्योगिक इकाइयों को कोयले की आपूर्ति होती है. वहीं बोकारो के बालीडीह औद्योगिक क्षेत्र की कई फैक्ट्रियों को सिंगरौली, दुदीचुआं और निगाही जैसे कोयला क्षेत्रों से गढ़वा या गुमला के रास्ते कोयले की आपूर्ति की जाती है.

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रायपुर से धनबाद तक जुड़ेगा औद्योगिक नेटवर्क

रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और झारखंड के कई प्रमुख औद्योगिक तथा खनिज क्षेत्रों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है. प्रस्तावित मार्ग छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और जशपुर होते हुए झारखंड के गुमला, रांची, बोकारो और धनबाद तक पहुंचता है.

इससे कोयला और अन्य खनिजों के परिवहन के साथ औद्योगिक माल की आवाजाही के लिए भी बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होने की उम्मीद है. कॉरिडोर से कोल इंडिया की विभिन्न इकाइयों को जोड़ने वाले मार्गों को भी मजबूती मिल सकती है. इसके अलावा लिंक सड़कों के माध्यम से सेल के बोकारो इस्पात संयंत्र, भिलाई इस्पात संयंत्र और दुर्गापुर इस्पात संयंत्र जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के बीच संपर्क बेहतर होने की संभावना है.

बोकारो से रायपुर की दूरी और समय होगा कम

वर्तमान में सड़क मार्ग से बोकारो से रायपुर पहुंचने में 15 घंटे से अधिक समय लगने की बात कही जा रही है. कॉरिडोर के विकसित होने के बाद यह सफर करीब 8 से 9 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है. इससे कोयला, इस्पात और अन्य औद्योगिक उत्पादों की ढुलाई में लगने वाला समय कम हो सकता है. परिवहन समय घटने से औद्योगिक गतिविधियों और व्यापार को भी गति मिलने की संभावना है.

जशपुर-पत्थलगांव क्षेत्र में निर्माण कार्य तेज

परियोजना के तहत विभिन्न हिस्सों में सड़क निर्माण का काम चल रहा है. छत्तीसगढ़ के जशपुर से पत्थलगांव की ओर सड़क निर्माण कार्य में तेजी आने की जानकारी है. परियोजना से जुड़े हिस्सों का निर्माण पूरा होने के बाद झारखंड और छत्तीसगढ़ के बीच सड़क संपर्क पहले की तुलना में बेहतर होने की उम्मीद है.

बोकारो के लिए इस कॉरिडोर का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि जिला एक ओर इस्पात उद्योग का प्रमुख केंद्र है, वहीं आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में कोयला और अन्य कच्चे माल की नियमित आवाजाही होती है. बेहतर सड़क नेटवर्क से इन क्षेत्रों के बीच माल परिवहन को अपेक्षाकृत कम समय में पूरा करने में मदद मिल सकती है.

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