बार की स्वतंत्रता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बाहर विरोध, स्वाति सिन्हा बोली- चुनावी जनादेश का हो सम्मान

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बार की स्वतंत्रता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बाहर अधिवक्ताओं का शांतिपूर्ण विरोध. चुनाव में उतरे अधिवक्ताओं के सहयोजन पर सवाल उठाए गए, चुनावी जनादेश के सम्मान की मांग की गई.

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नई दिल्ली/रांची. झारखंड हाईकोर्ट की अधिवक्ता स्वाति सिन्हा के नेतृत्व में बार की स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बाहर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन में झारखंड समेत विभिन्न राज्यों से महिला और पुरुष अधिवक्ता शामिल हुए.

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प्रदर्शन के दौरान स्वाति सिन्हा ने योगमाया बनाम भारत संघ मामले में महिलाओं के लिए निर्धारित 30 प्रतिशत आरक्षण और सहयोजन (को-ऑप्शन) की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि व्यवस्था में 20 प्रतिशत प्रतिनिधित्व चुनाव के माध्यम से और 10 प्रतिशत सहयोजन के माध्यम से रखा गया था. उनके अनुसार, सहयोजन का उद्देश्य उन महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना था जो चुनाव में आगे नहीं आ पातीं.

चुनाव लड़ने वाली महिला अधिवक्ताओं को सहयोजित करने की मांग

स्वाति सिन्हा ने कहा कि जब कई महिला अधिवक्ताओं ने चुनाव लड़ा और छठे-सातवें स्थान तक पहुंचीं, तो चुनाव में शामिल नहीं हुई महिलाओं को सहयोजित करने की आवश्यकता पर सवाल उठता है. उन्होंने आशंका जतायी कि इससे पक्षपात को बढ़ावा मिल सकता है.

उन्होंने दावा किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी इस मामले में आवेदन देकर चुनाव में छठे-सातवें स्थान पर रहीं महिला अधिवक्ताओं को सहयोजित करने का तंत्र सुझाया था. उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस व्यवस्था को निष्पक्ष तंत्र बताया था, लेकिन 4 अगस्त 2026 के आदेश में दो महिलाओं में एक सीनियर एडवोकेट और एक सेवानिवृत्त जज को सहयोजित करने की बात कही गयी.

बार के मामलों में न्यायपालिका के हस्तक्षेप पर उठाया सवाल

स्वाति सिन्हा ने संविधान के अनुच्छेद 220 का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज पर उस राज्य में वकालत करने को लेकर संवैधानिक प्रतिबंध है, जहां उन्होंने न्यायाधीश के रूप में सेवा की है. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में सेवानिवृत्त जज के बार काउंसिल की सदस्य बनने की स्थिति क्या होगी.

उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया और एडवोकेट्स एक्ट, 1961 जैसी संस्थागत व्यवस्थाओं के बावजूद यदि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सहयोजन का अधिकार दिया जाता है, तो इससे बार की स्वतंत्रता प्रभावित होने और बार के मामलों में न्यायपालिका के हस्तक्षेप की आशंका है.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बार की स्वतंत्रता अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है और चुनाव में मतदाताओं द्वारा व्यक्त किए गए जनादेश का भी सम्मान किया जाना चाहिए.

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