वेतन में देरी पर केजरीवाल सरकार और DUTA में जंग, केन्द्र से की हस्तक्षेप की मांग

Published by : Pritish Sahay Updated At : 09 Sep 2022 6:48 PM

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डूटा (DUTA) के अध्यक्ष एके बागी ने कहा है कि दिल्ली सरकार का कहना है कि फंड के अभाव में शिक्षकों के वेतन में देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज समेत अन्य 12 कॉलेजों में बीते 4 सालों से वेतन में कटौती की जा रही है.

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दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज में वेतन में कटौती का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है. इस मामले को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने सामने हैं‍. वहीं, एएनआई में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर एसोसिएशन (DUTA) के चीफ का कहना है कि दिल्ली सरकार शिक्षकों को सैलरी नहीं दे पा रही है. उन्होंने केंद्र से आग्रह किया है कि दिल्ली सरकार की ओर से चलाये जा रहे कॉलेज को अपने अधीन ले ले. वहीं, डूटा ने दावा किया है कि दिल्ली के 12 कॉलेजों करीब-करीब यही हाल है.

दिल्ली सरकार के पास नहीं है फंड: एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, डूटा (DUTA) के अध्यक्ष एके बागी ने कहा है कि दिल्ली सरकार का कहना है कि फंड के अभाव में शिक्षकों के वेतन में देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज समेत अन्य 12 कॉलेजों में बीते 4 सालों से वेतन में कटौती की जा रही है. बागी ने यह भी कहा कि इसके खिलाफ डूटा ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ले लेकर डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया तक के आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किया, लेकिन उनकी मांगों की कहीं सुनवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार इन कॉलेजों को अपने अधीन ले ले.

वेतन कटौती से बुरा हाल: डूटा ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, दिल्ली सरकार के अधीन 12 अन्य कॉलेजों में भी बीते कुछ सालों से अपर्याप्त ग्रांट और अनियमित वेतन दी जा रही है. वेतन कटौती के कारण शिक्षकों और गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के लिए घर चलाना भी मुश्किल हो गया है. डूटा चीफ एके भागी का कहना है कि प्रोफेसरों को त्योहारी सीजन में भी वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 12 कॉलेजों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग का एरियर समेत अन्य सुविधाएं नहीं दी गई है.

गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज प्रशासन की ओर से एक नोटिस जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि असिस्टेंट प्रोफेसरों और एसोसिएट प्रोफेसर वेतन से 30 हजार से लेकर 50 हजार रुपये रोके जा रहे हैं. नोटिस में इसका भी जिक्र है कि जैसे ही फंड मिलेगी बकाया रकम का भुगतान कर दिया जाएगा. इसके लेकर डूटा में जोरदार आक्रोश है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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