Delhi Bike Taxi: दिल्ली में नहीं चलेगी बाइक टैक्सी, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगायी

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 12 Jun 2023 5:28 PM

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Delhi Bike Taxi News: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ दिन पहले केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था. कोर्ट ने उबर और रैपिडो बाइक सहित बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स को दिल्ली में चलाने की अनुमति देने पर केंद्र का रुख पूछा था.

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी जिसमें राजधानी दिल्ली में बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति दी गयी थी. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से यह आग्रह किया कि वे इस मामले का निपटारा जल्दी से जल्दी करें.

दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने लगायी थी गुहार

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कुछ दिन पहले केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था. कोर्ट ने उबर और रैपिडो बाइक सहित बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स को दिल्ली में चलाने की अनुमति देने पर केंद्र का रुख पूछा था. दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट के 26 मई के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसमें यह निर्देश दिया गया था जब तक अरविंद केजरीवाल की सरकार नियमों को अधिसूचित नहीं करती है तब तक बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जायेगी.


साल की शुरुआत में बाइक-टैक्सी नहीं चलाने का हुआ था आदेश

ज्ञात हो कि दिल्ली सरकार ने इस साल की शुरुआत में एक नोटिस जारी किया था जिसमें यह कहा गया था कि दिल्ली में बाइक-टैक्सी नहीं चलाई जाये. साथ ही यह चेतावनी भी दी थी कि नोटिस का उल्लंघन करने वालों को एक लाख रुपये तक के जुर्माने का भुगतान करना पड़ेगा.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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