पत्नी के हत्यारे को 10 साल की सजा 10 मई, 2011 की है घटना

Updated at : 20 Apr 2016 1:22 AM (IST)
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पत्नी के हत्यारे को 10 साल की सजा 10 मई, 2011 की है घटना

हाजीपुर : पीट-पीटकर पत्नी की हत्या कर देने के जुर्म में एक व्यक्ति को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएन मिश्रा ने सत्र वाद संख्या-352/11 की सुनवाई के बाद यह सजा सुनायी. क्या थी घटना : शहर के बागमली मुहल्ला निवासी जगदीश चौधरी के पुत्र लालबाबू […]

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हाजीपुर : पीट-पीटकर पत्नी की हत्या कर देने के जुर्म में एक व्यक्ति को 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनायी गयी है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएन मिश्रा ने सत्र वाद संख्या-352/11 की सुनवाई के बाद यह सजा सुनायी.

क्या थी घटना : शहर के बागमली मुहल्ला निवासी जगदीश चौधरी के पुत्र लालबाबू चौधरी ने अब से पांच वर्ष पूर्व 10 मई, 2011 को अपनी पत्नी संगीता देवी की जम कर पिटाई कर दी. इस पिटाई के कारण 11 मई को उसकी मृत्यु हो गयी. मृत्यु के बाद वह अपनी पत्नी का दाह संस्कार करने जा रहा था कि इसकी सूचना मृतका के भाई विजय चौधरी को मिली और उसने नगर पुलिस को सूचित कर दिया. सूचना मिलते ही पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज कर नगर थाना कांड संख्या-260/11 दर्ज की.
पुत्र ने दी गवाही : इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक लोक अभियोजक ख्वाजा हसन खान ने न्यायालय में कई साक्ष्य प्रस्तुत किये. मृतका के पुत्र मनीष कुमार ने न्यायालय में अपने पिता के विरुद्ध गवाही दी.
दस साल की सजा : न्यायालय में पेश किये गये साक्ष्यों के अवलोकन एवं दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद न्यायालय ने लालबाबू चौधरी को भादवि की धारा 304 के अपराध का दोषी पाते हुए मंगलवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई की. सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने दस साल सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी.
सजा सुनते ही हुआ बेहोश : न्यायालय से सजा सुनाये जाने के बाद जब पुलिसकर्मी उसे लेकर न्यायालय परिसर स्थित कैदी हाजत में ले जा रहे थे कि सीढ़ी के निकट वह बेहोश होकर गिर गया. गिरते ही पुलिसकर्मियों ने उसे पानी का फुहारा देकर होश में लाया और हाजत में ले गये.
हाजत से भागने का किया प्रयास : न्यायालय से वापस लाने पर पुलिसकर्मियों ने उसे हाजत में बंद करने के बजाय मानवता के कारण कुछ देर बाहर पंखे की हवा में रखा ताकि उसकी तबीयत संभल जाये. लेकिन पुलिसकर्मी जैसे ही अपने काम में व्यस्त हुए वह हाजत के बरामदे से निकल कर बाहर गेट की ओर भागने लगा.
पुलिसकर्मियों के द्वारा हल्ला किये जाने पर न्यायालय के प्रवेश द्वार से कुछ कदम पहले अधिवक्ता राजीव कुमार ने उसे पकड़ लिया और पुलिसकर्मियों के हवाले कर दिया.
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