शराबबंदी का दिख रहा सकारात्मक असर

Updated at : 19 Apr 2016 12:17 AM (IST)
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शराबबंदी का दिख रहा सकारात्मक असर

मजदूरों की गाढ़ी कमाई अब पहुंच रही है घर, घरों का बदला माहौल महुआ सदर : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक अप्रैल, 2016 से देशी-विदेशी शराब के निर्माण, बिक्री एवं इसके सेवन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाये जाने की ऐतिहासिक पहल का काफी सकारात्मक पहलू देखने को मिल रहा है. इसके फलस्वरूप घरेलू हिंसा, महिला प्रताड़ना, […]

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मजदूरों की गाढ़ी कमाई अब पहुंच रही है घर, घरों का बदला माहौल

महुआ सदर : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक अप्रैल, 2016 से देशी-विदेशी शराब के निर्माण, बिक्री एवं इसके सेवन पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाये जाने की ऐतिहासिक पहल का काफी सकारात्मक पहलू देखने को मिल रहा है. इसके फलस्वरूप घरेलू हिंसा, महिला प्रताड़ना, सड़क दुर्घटना, अापराधिक घटनाओं में अप्रत्याशित रूप से काफी कमी देखने को मिल रही है.
रोक से मध्यम वर्गीय लोग हैं खुश : शराब के सेवन, निर्माण एवं बिक्री पर पूर्णरूपेण प्रतिबंध लगने से मध्यम वर्गीय परिवारों में समृद्धि और खुशहाली लौटने लगी है. इसके कारण खास कर महिलाएं एवं उनके बच्चे अधिक खुश हैं. सिंघाड़ा उत्तरी पंचायत कि समाजसेविका एवं मुखिया प्रत्याशी रूबी कुमारी, इंटर की छात्रा साक्षी सिंह, राजद नेत्री रेखा चौधरी, महुआ बाजार की गृहिणी मधु गुप्ता आदि का कहना है
कि शराब के निर्माण, सेवन एवं बिक्री पर पूर्णत: प्रतिबंध लग जाने से पुरुष प्रधान इस समाज में मेहनत की गाढ़ी कमाई अब महिलाओं के हाथों में मिलने लगी है. इससे मध्यम वर्गीय परिवारों में खुशहाली और समृद्धि लौटने लगी है.
आपराधिक घटनाएं हुईं कम : शराबबंदी के बाद से अप्रत्याशित रूप से घरेलू हिंसा, महिला प्रताड़ना, सड़क दुर्घटना एवं अापराधिक घटनाओं पर अचानक ही कमी आ गयी है.
शिक्षाविद् प्रो राजेश्वर गुप्त, जअपा के पूर्व प्रत्याशी जागेश्वर राय, कलाविद् राकेश लाल बिहारी, एनएन कॉलेज के व्याख्याता प्रो अरुण कुमार, आर्य उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के सचिव रमाशंकर चौधरी आदि के मुताबिक, शराब के नशे में ज्यादातर पुरुष अपनी पत्नी के साथ मारपीट की घटनाओं को अंजाम देते थे.
नशे की हालत में तेज एवं अनियंत्रित वाहन चालन के कारण रोजाना कई सड़क दुर्घटनाओं में जान जाने की खबरों सहित नशापान के कारण ही बड़ी-बड़ी अापराधिक घटनाओं को अंजाम देने की प्रवृत्ति में भारी कमी आयी है, जो इसकी सकारात्मक पहलुओं का बेहतर नमूना है.
अस्पताल एवं क्लिनिकों में भरती मरीजों में आयी कमी : नशापान के कारण जहां पहले सरकारी एवं निजी नर्सिंग होम नशापान के मरीजों से पटे रहते थे, अब उसमें भी पहले की अपेक्षा काफी कमी आ गयी है. अनुमंडल अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनिल कुमार एवं निजी क्लिनिक के संचालक डॉ एमके सिंह के मुताबिक, अस्पतालों में नशापान के कारण ज्यादातर बेड भरे रहते थे. शराबबंदी के कारण लगातार उसमें गिरावट आ रही है, जो कि एक शुभ संकेत है.
होटलों, लाइन होटल व ढाबे का धंधा पड़ा मंदा :
जहां एक ओर लोग बिहार में पूर्ण रूप से शराबबंदी जैसे साहसिक फैसले लेनेवाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कि तारीफ करते नहीं थकते, वहीं नशापान करने की लत के शिकार लोग उन्हें मन-ही-मन कोसने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. पहले जहां होटल, ढाबा या लाइन होटल में दिन भर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिलती थी, पूर्ण शराबबंदी होने के कारण उक्त व्यवसाय पर काफी बुरा प्रभाव पर रहा है.
शराब-बियर पीने के ख्याल से आते थे ग्राहक :
दिनभर ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहनेवाले होटलों, ढाबों एवं लाइन होटलों में बमुश्किल इक्का-दुक्का खाना खानेवाले ग्राहक ही नजर आ रहे हैं. यहां यह कहना जल्दबाजी नहीं होगी कि इन होटलों में ग्राहक खाने को कम नशापान के लिए ज्यादा आते थे, जहां शराबबंदी होने के कारण यह व्यवसाय घाटे का सौदा साबित हो रहा है.
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