पीड़िता को ससुराल पहुंचाने गयी पुलिस बैरंग लौटी

Updated at : 26 Feb 2016 1:22 AM (IST)
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पीड़िता को ससुराल पहुंचाने गयी पुलिस बैरंग लौटी

सरकार घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण का अधिकार कानून बनाकर महिलाओं के संरक्षण का दावा कर रही है लेकिन हालात यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद पीड़िता को ससुराल वालों ने न केवल घर में रखने से इनकार कर दिया. उसे ससुराल में पहुंचाने गई पुलिस मौके पर मूकदर्शक बनी रही जबकि […]

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सरकार घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण का अधिकार कानून बनाकर महिलाओं के संरक्षण का दावा कर रही है लेकिन हालात यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद पीड़िता को ससुराल वालों ने न केवल घर में रखने से इनकार कर दिया. उसे ससुराल में पहुंचाने गई पुलिस मौके पर मूकदर्शक बनी रही जबकि ससुराल वालों ने घर में ताला बंद कर उसे बाहर से हीं लौटने पर विवश कर दिया.

हाजीपुर : न्यायालय के आदेश पर ससुराल गयी विवाहिता को ससुराल वालों ने धक्का देकर बाहर कर कर दिया और घर में ताला जड़ दिया. न्यायालय के आदेश पर पुलिस बल के साथ ससुराल रहने पहुंची विवाहिता विवश होकर मायके लौट गयी. इस दौरान प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारी मूकदर्शक बने रहे और बगैर आदेश का अनुपालन कराये ही बैरंग वापस हो गये.
क्या है मामला : पटना जिले के लोदीकटरा मुहल्ला निवासी गोरख प्रसाद की पुत्री पम्मी सोनी की शादी शहर के गुदरी बाजार निवासी स्वर्ण व्यवसायी एवं पतालेश्वर ज्वेलर्स एवं सोनी एंड संस के मालिक सुनील कुमार सोनी के पुत्र मनीष कुमार सोनी के साथ वर्ष 2010 में हुई थी.
शादी के बाद ससुराल वालों की दहेज प्रताड़ना से तंग आकर सोनी ने अपने ससुराल वालों के विरुद्ध दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था और केस के डर से ससुराल वालों ने उस मामले में पम्मी से सुलह कर उसे अपने घर ले गये. लेकिन उस मामले में जमानत मिलते ही ससुराल वालों ने उसे दो साल की बेटी के साथ दहेज की मांग को लेकर मारपीट कर घर से बाहर कर दिया.
क्या और किसका है आदेश : ससुराल से बाहर निकाले जाने के बाद पम्मी सोनी ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनयम 2005 की धारा 12 के अंतर्गत परिवाद पत्र संख्या 3971/13 दाखिल किया. इस मामले में पीड़िता ने न्यायालय से अपने ससुराल में रहने की इच्छा जताते हुए संरक्षण की मांग की.
मामले की सुनवाई और महिला हेल्प लाइन के प्रतिवेदन के बाद अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय ने 24 जनवरी, 2014 को पीड़िता के पति को आदेश दिया कि वह अपनी पत्नी को अपने घर में रहने के लिए जगह दे और उस मकान की समुचित मरम्मत कराते रहे. इसके साथ ही पीड़िता और उसकी पुत्री के भरण-पोषण के लिए प्रत्येक माह 12 हजार रुपये दे और यह सुनिश्चित करे कि उसकी प्रताड़ना न हो.
क्या कहती है पीड़िता : आज की घटना की जानकारी अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय को दूंगी और न्यायालय के आदेश का पालन करूंगी. अपने बच्चे और अपने सुरक्षित जीवन के लिए संघर्ष करूंगी.
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