कहां गयी बेटी के जन्म पर बधाई व मिठाई !

Updated at : 23 Feb 2016 8:07 AM (IST)
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कहां गयी बेटी के जन्म पर बधाई व मिठाई !

लापरवाही . 22 जनवरी, 2015 को जिले में इस कार्यक्रम की शुरुआत पर हुई थी घोषणा वैशाली जिला बिहार का इकलौता जिला है, जहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम चलाया जा रहा है. जिले का प्रशासनिक तंत्र इस अतिमहत्वाकांक्षी कार्यक्रम के प्रति भी संवेदनशील नहीं है. यहां लगातार घटता लिंगानुपात जिले के लिए सबसे बड़ी […]

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लापरवाही . 22 जनवरी, 2015 को जिले में इस कार्यक्रम की शुरुआत पर हुई थी घोषणा
वैशाली जिला बिहार का इकलौता जिला है, जहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम चलाया जा रहा है. जिले का प्रशासनिक तंत्र इस अतिमहत्वाकांक्षी कार्यक्रम के प्रति भी संवेदनशील नहीं है. यहां लगातार घटता लिंगानुपात जिले के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है.
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के लिए भारत सरकार ने देश भर के ऐसे 100 जिलों का चयन किया है, जहां शिशु लिंगानुपात में यानी बेटियों का संख्या में निरंतर गिरावट दर्ज की गयी है. इनमें वैशाली को इसलिए शामिल किया गया है, क्योंकि पूरे राज्य में यहां लिंगानुपात सबसे कम है.
हाजीपुर : कैसे बचेंगी बेटियां, जब उन्हें बचाने का संकल्प ही खानापूरी में बदलने लगे. वैशाली जिला बिहार का इकलौता जिला है, जहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम चलाया जा रहा है. जिले का प्रशासनिक तंत्र इस अतिमहत्वाकांक्षी कार्यक्रम के प्रति भी संवेदनशील नहीं है. यहां लगातार घटता लिंगानुपात सबसे बड़ी चिंता का विषय है.
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के लिए भारत सरकार ने देश भर के ऐसे 100 जिलों का चयन किया है, जहां शिशु लिंगानुपात में यानी बेटियों का संख्या में निरंतर गिरावट दर्ज की गयी है. इनमें वैशाली को इसलिए शामिल किया गया है, क्योंकि पूरे राज्य में यहां लिंगानुपात सबसे कम है. वर्ष 2001 में यह 949 था, जो वर्ष 2011 में घट कर 913 पर आ गया है.
एक साल पहले हुई कार्यक्रम की शुरुआत : वैशाली जिले के लिए काफी मायने रखने वाला यह कार्यक्रम आज बैठकों, सेमिनारों और रस्मी आयोजनों तक सीमित रह गया है.
22 जनवरी, 2015 को जिले में जब इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी थी, तो इसे कारगर बनाने के लिए पंचायत स्तर तक उन्मुखीकरण, संवेदीकरण पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षकों, चिकित्सकों एवं अभिभावकों के बीच कन्या शिशु की महत्ता के प्रति जागरूकता का माहौल बनाने, मॉनीटरिंग आदि कार्यों पर बल दिया गया था. अनुमंडल से लेकर प्रखंड स्तर तक टास्क फोर्स का गठन और शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायती राज आदि विभागों के सम्मिलित प्रयास से जागरूकता अभियान चलाने की बातें कही गयी थीं. आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिले में इस कार्यक्रम का भी वहीं हश्र होगा, जो देसरी को निर्मल प्रखंड बनाने का हुआ.
नहीं हो रहा पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट का पालन : जिले में लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कन्या भ्रूण परीक्षण करने वाले चिकित्सकों एवं अल्ट्रासाउंड केंद्रों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई का निर्णय लिया गया था. स्वास्थ्य विभाग द्वारा अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच के लिए धावा दल का गठन हुआ. धावा दल को हर महीने कम-से-कम पांच अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया.
इन सबके बावजूद जिले में कन्या भ्रूण परीक्षण का धंधा बदस्तूर जारी है. बड़ी चालाकी के साथ अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालक इस अवैध कारनामे को अंजाम दे रहे हैं. इसके लिए संचालकों द्वारा कोड का इस्तेलमाल किया जाता है, जिसे आसानी से पकड़ना मुश्किल है.
जानकार बताते है कि शिशु लिंग परीक्षण के लिए इन जांच सेंटरों पर 19 और 16 जैसे कोड का प्रयोग किया जाता है. 19 का मतलब गर्ल और 16 का मतलब ब्यॉय बताया जाता है. इधर अल्ट्रासाउंड केंद्रों के निरीक्षण के नाम पर यदा-कदा खानापूरी ही की जाती है. पिछले साल के दिसंबर महीने में शहर के आठ अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच की गयी थी. इसके बाद फिर यह काम कब होगा, कहना मुश्किल है.
बेटी के जन्म पर बधाई और मिठाई का इंतजार ही रह गया : लगभग एक साल हो गये, अस्पतालों में बेटियों के जन्म पर मिठाई बांटे जाने का आज तक लोग इंतजार ही करते रह गये.
चार मार्च ,2015 को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के जिला टास्क फोर्स की बैठक में तत्कालीन जिलाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने यह घोषणा की थी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि सरकारी अस्पतालों में बेटियों के जन्म लेने पर उनके परिजनों को बधाई पत्र दिये जाएं और मिठाई बांटी जाये. बधाई और मिठाई मिलने की बात तो दूर, अस्पताल में प्रसव को आने वाले परिजनों के साथ उचित व्यवहार तक नहीं होता.
(क्रमश:)
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