बांग्लादेश से नहीं आये परिजन, मौत के 48 दिन बाद तौफिक सुपुर्द-ए-खाक, जानिये क्या है मामला

Updated at : 12 Feb 2021 12:56 PM (IST)
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बांग्लादेश से नहीं आये परिजन, मौत के 48 दिन बाद तौफिक सुपुर्द-ए-खाक, जानिये क्या है मामला

आखिरकार बांग्लादेश से परिजन नहीं आये और तौफिक का पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सुपुर्द-ए-खाक मौत के 48 दिन के बाद गुरुवार को भागलपुर में कर दिया गया.

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भागलपुर. आखिरकार बांग्लादेश से परिजन नहीं आये और तौफिक का पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सुपुर्द-ए-खाक मौत के 48 दिन के बाद गुरुवार को भागलपुर में कर दिया गया. बांग्लादेशी नागरिक तौफिक की मौत जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में इलाज के दौरान 25 दिसंबर को हो गयी थी. पूर्णिया कारा से उसका शव लेने के लिए कर्मी आये थे और अंजुमन इस्लामिया संस्था के सौजन्य से सुपुर्द-ए-खाक किया गया.

जब जेल में था, तो अपना कोई मिलने नहीं आया. सजा पूरी कर ली और जेल के बाहर वह निर्वासन केंद्र में रखा गया, लेकिन तब भी परिवार के कोई सदस्य मिलने नहीं आये थे. पिछले 48 दिनों से बांग्लादेश के रहनेवाले तौफिक का शव जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, भागलपुर में डीप फ्रीजर में रखा था, लेकिन फिर भी परिजन नहीं आये.

क्या है पूरा मामला

बांग्लादेश के मल्लिकुर कंसार स्थित चकीती के रहनेवाले आफताब का बेटा था तौफिक. वह 13 जनवरी 2010 को पूर्णिया जिले के चूनापुर एयरफोर्स स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था. उसके पास से पुलिस को न तो कोई वीजा मिला था और न ही भारत में रहनेवाले कोई संबंधी ही मिले. उसे तीन साल की सश्रम कारावास की सजा और तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया था.

अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी थी. सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश वापसी की प्रत्याशा में सितंबर 2017 से निर्वासन केंद्र में रखा गया था, लेकिन उसे कोई वापस ले जाने के लिए नहीं आया. तबीयत बिगड़ने पर उसे 24 नवंबर 2020 को पूर्णिया अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया. तबीयत में सुधार न देख उसे बेहतर इलाज के लिए पांच दिसंबर को जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया. इलाज के दौरान गत 25 दिसंबर को उसकी मौत हो गयी.

पूर्णिया डीएम की मांग पर गृह विभाग ने की पहल

तौफिक की मौत के बाद पूर्णिया डीएम ने गृह विभाग को यह सूचना दी कि तौफिक के शव को डीप फ्रीजर में रखा गया है. डीएम ने मांग की कि शव के सुपुर्द-ए-खाक के लिए दिशा-निर्देश दें. इस पर बिहार सरकार के गृह विभाग (विशेष शाखा) के अवर सचिव गिरीश मोहन ठाकुर ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव को पत्र भेजा. इसमें अनुरोध किया गया है कि विदेशी के सुपुर्द-ए-खाक व अन्य कार्रवाई के संदर्भ में अविलंब मार्गदर्शन दिया जाये.

कारा आइजी के निर्देश पर हुई कार्रवाई

पूर्णिया सेंट्रल जेल के अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने बताया कि कारा महानिरीक्षक पटना के आदेश के बाद तौफिक का सुपुर्द-ए-खाक अंजुमन इस्लामिया के सौजन्य से भागलपुर में कर दिया गया. वहीं जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ हेमंत कुमार सिन्हा ने बताया कि दोपहर में पूर्णिया कारा से दो कर्मी आये थे, जिन्हें तौफिक का शव सौंप दिया गया. शव सौंपने का निर्देश पहले ही मिल चुका था.

Posted by Ashish Jha

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