दांडी यात्रा से लेकर 'भारत छोड़ो आंदोलन' तक अंग्रेजों से लड़े पंडित अच्युतानंद झा, पढ़ें इस अमर सेनानी की गाथा

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अच्युतानंद झा परिजनों के साथ | Prabhat Khabar Network

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सुपौल के पंडित अच्युतानंद झा, जिन्होंने दांडी यात्रा और भारत छोड़ो आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी. उनके देशभक्ति के जज्बे ने अनगिनत युवाओं को प्रेरित किया है.

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शरीर भले ही नश्वर हो, लेकिन इंसान के कर्म और कीर्ति उसे हमेशा अमर कर देते हैं. सुपौल जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत जगतपुर गांव के निवासी स्वर्गीय पंडित अच्युतानंद झा का नाम ऐसे ही प्रखर और महान स्वतंत्रता सेनानियों में शुमार है. दांडी यात्रा से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक, उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जमकर लोहा लिया. पारिवारिक जिम्मेदारियों से ऊपर देश को तरजीह देने वाले इस अमर सेनानी का संघर्ष आज भी युवाओं में राष्ट्रप्रेम का जज्बा भरता है.

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बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति व कूट-कूट कर भरी थी देशभक्ति

स्व. अच्युतानंद झा का जन्म 15 अगस्त 1886 को तत्कालीन भागलपुर जिले (अब सुपौल अनुमंडल) से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित जगतपुर गांव में हुआ था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही विद्यालयों में संपन्न हुई. बचपन से ही वे गहरी धार्मिक प्रवृत्ति के धनी थे, लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ी, उनके भीतर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह और देश को स्वतंत्र कराने का जुनून भी उफान मारने लगा.

दांडी यात्रा से 'भारत छोड़ो आंदोलन' तक निभाई सक्रिय भूमिका

पारिवारिक दायित्वों को किनारे रखकर उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना और स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े:

  • दांडी यात्रा में भागीदारी: अंग्रेजी शासन की मुखालफत करते हुए उन्होंने दांडी यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लिया. अपने क्रांतिकारी तेवरों के कारण वे हमेशा ब्रिटिश पुलिस की आंखों की किरकिरी बने रहे.
  • भारत छोड़ो आंदोलन और जेल यात्रा: 9 अगस्त 1942 को जब महात्मा गांधी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' का बिगुल फूंका, तो वे इसमें प्रमुखता से शामिल हुए. इस बगावत के कारण अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया.
  • यातनाओं के आगे नहीं झुके: जेल में उन्हें भयंकर यातनाएं दी गईं, लेकिन उनका हौसला डिगा नहीं. इस आंदोलन में उनके साथ स्वतंत्रता सेनानी स्व. जयराम मिश्र सहित कई अन्य साथी भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे.

जन्म और पुण्यतिथि का ऐतिहासिक घटनाओं से अद्भुत संयोग

स्व. अच्युतानंद झा के जीवन का एक बेहद खास पहलू उनकी जन्म और निधन की तिथियां हैं, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से सीधे जुड़ती हैं:

  • उनका जन्म 15 अगस्त को हुआ था (15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ).
  • उनका निधन 9 अगस्त 1971 को हुआ (9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ था).

आज स्वतंत्रता सेनानी स्व. पंडित अच्युतानंद झा का नाम प्रखंड कार्यालय के शिलापट्ट पर स्वर्णाक्षरों में अंकित है. लोग जब भी इस शिलापट्ट को देखते हैं, इस महान रणबांकुरे के त्याग, साहस और समर्पण को शत-शत नमन करते हैं.


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