भारी बारिश से बढ़ता जा रहा कोसी का जलस्तर तीसरे दिन डिस्चार्ज एक लाख क्यूसेक के पार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Jul 2019 3:44 AM (IST)
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सुपौल : मानसून काल प्रारंभ होते ही जिले के कोसी प्रभावित क्षेत्र में बसे लाखों लोगो की मुश्किलें बढ़ने लगी है. गत दो दिनों से भारत व नेपाल स्थित कोसी के जल अधिग्रहण क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण कोसी का जलस्तर बढ़ने लगा है. जिसके कारण तटबंध के अंदर बसे लोगों की परेशानी […]
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सुपौल : मानसून काल प्रारंभ होते ही जिले के कोसी प्रभावित क्षेत्र में बसे लाखों लोगो की मुश्किलें बढ़ने लगी है. गत दो दिनों से भारत व नेपाल स्थित कोसी के जल अधिग्रहण क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण कोसी का जलस्तर बढ़ने लगा है. जिसके कारण तटबंध के अंदर बसे लोगों की परेशानी भी बढ़ने लगी है.
जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद बांध के अंदर कई गांवों में बाढ़ का पानी फैलने लगा है. जिससे फसलें डूबने लगी है. वहीं नदी किनारे बसे गांवों के घरों में भी पानी घुसने लगा है. जिससे प्रभावित क्षेत्र के लोगों में दहशत का माहौल व्याप्त है.
वहीं विस्थापन की समस्या भी शुरू हो गयी है. पानी बढ़ने के बाद कोसी पीड़ितों के समक्ष सुरक्षित ठिकाने की तलाश, पशुओं के लिये चारा, शुद्ध पेयजल, दवा आदि की चिंता बढ़ गयी है. गौरतलब है कि कोसी समस्या का अब तक स्थायी निदान नहीं किया गया है. नतीजा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बसे लाखों की आबादी को हर साल मानसून काल में बाढ़ की विभीषिका झेलना उनकी नियति बन चुकी है.
कोसी पीड़ितों को इस बात का अब तक मलाल है कि तटबंध निर्माण काल में सरकार द्वारा उनके साथ किये गये वादे अब तक पूरे नहीं किये गये. जमीन के बदले जमीन, घर के बदले घर, हर परिवार को एक सरकारी नौकरी व पुनर्वास आदि का वादा आज भी अधूरा है. यही वजह है कि कष्ट रहने के बावजूद हर साल बाढ़ की तबाही झेलना कोसी वासियों की मजबूरी बनी हुई है.
तटबंध के अंदर अब तक नहीं हुई नाव की बहाली, लोगों में बढ़ रहा आक्रोश
वीरपुर. बाढ़ अवधि प्रारंभ हो जाने के बावजूद पूर्वी कोशी तटबंध के अंदर बसे गांव के लोगों के लिये प्रशासन द्वारा अब तक पर्याप्त संख्या में नाव की बहाली नहीं की गयी है. पूर्वी कोशी तटबन्ध के अंदर छतौनी, टेढ़ी बाजार, परसाही, चौदीप, गोबर्गरहा, डुमरी मिलिक आदि प्रमुख गांव हैं. जिनके आवाजाही के लिये बाढ़ अवधि में पूर्वी कोशी तटबंध के 06.10, 12.37, 16.64, 17.25 एवं 18.50 किलोमीटर स्पर से अंचल की ओर से सरकारी स्तर पर नाव का हर साल परिचालन किया जाता है. लेकिन इस साल 15 जून से बाढ़ काल प्रारंभ होने के करीब एक माह बीत जाने के बाद भी नाव की बहाली नहीं हुई है.
नतीजा है कि लोगों को तटबंध के भीतर आवाजाही के लिये निजी नाव पर निर्भर रहना पर रहा है. जिनके द्वारा मोटी रकम वसूल की जाती है. पूर्व वार्ड सदस्य एवं छतौनी निवासी चंदेश्वरी यादव कहते हैं कि अंचल कार्यालय का रवैया मनमानी पूर्ण है. छतौनी निवासी अमरेश पासवान कहते हैं कि कोशी में पानी काफी बढ़ गया है. लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. ससमय नाव बहाली नहीं होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गयी है.
परसाही निवासी राजेन्द्र मुखिया ने कहा कि तटबंध के भीतर गरीब लोग ही रहते हैं. जिनको बाहर बसने का कोई साधन नहीं है. नाव बहाली के नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ गयी है. अंचल कर्यालय अविलंब नाव की बहाली करें. राजस्व कर्मचारी शशि सिंह ने बताया कि नाविकों को नाव का निबंधन कराने को कहा गया है. निबंधन में विलंब से नहीं हुई नाव की बहाली
कहते हैं सीओ
बसंतपुर सीओ विद्यनानंद झा ने बताया कि एमभीआई द्वारा पहले नाव का निबंधन करना है. निबंधन में विलंब होने के कारण ही नाव की बहाली नहीं हो पाई है.
डिस्चार्ज में हो रही बढ़ोतरी लोगों की बढ़ी बेचैनी
भारी बारिश के कारण कोसी के जलस्राव में लगातार वृद्धि हो रही है. मंगलवार को निरंतर तीसरे दिन कोसी बराज से नदी का डिस्चार्ज 01 लाख क्यूसेक के पार रहा. अपराह्न 04 बजे बराज से कुल 01 लाख 04 हजार 675 एवं बराह क्षेत्र से 89 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. जो बढ़ने के क्रम में है. कोसी के जल अधिग्रहण क्षेत्र में दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण नदी के जलस्तर में और भी बढ़ोतरी होने की संभावना जतायी जा रही है.
पूर्वी कोसी बांध में लगा रेनकट, भयभीत हैं लोग
वीरपुर. पूर्वी कोशी तटबंध में पहली बारिश में बना रेनकट लोगों को डरा रहा है. वर्ष 2008 की कोशी त्रासदी को देख चुके लोगों को कोशी में छोटी-मोटी हलचल भी परेशान कर देती है. पूर्वी कोशी तटबंध के दोनों ओर ये रेनकट बन चुके हैं. हालांकि इसको पाटने की कोशिश भी विभाग की ओर से की जा रही है. लेकिन अब भी भयावह रेनकट है, जिनको पाटा नहीं जा सका है.
पूर्वी कोशी तटबंध के गठिया 30 किलोमीटर से 02 किलोमीटर रानीगंज तक बॉर्डर रोड का निर्माण हैदराबाद की कंपनी आसिप एएमए आर द्वारा किया जा रहा है. सड़क किनारे के भाग में बरसात के समय होने वाले रेनकट से बचने के लिये घास लगाये गये हैं. एनसीभी किया गया है. इसके बावजूद रेनकट रुक नहीं पाया है. जिसको रोकने का प्रयास निर्माण एजेंसी आज भी कर रही है.
छह प्रखंडों के 36 पंचायत हैं बाढ़ प्रभावित
मालूम हो कि जिले के छह प्रखंडों के 36 पंचायत बाढ़ प्रभावित हैं. इनमें सुपौल प्रखंड के 08 पंचायत घुरन, बलवा, तेलवा, गोपालपुर सिरे, बैरिया, बसबिट्टी, रामदतपट्टी एवं बकौर, किसनपुर प्रखंड के 09 पंचायतों में परसा माधो, नौआबाखर, बौराहा, मौजहा, दुबियाही, कटहारा-कदमपुरा, किसनपुर दक्षिण, किसनपुर उत्तर एवं शिवपुरी, सरायगढ़-भपटियाही के पांच पंचायत बनैनिया, ढ़ोली, लौकहा, भपटियाही व सरायगढ़, निर्मली प्रखंड के 08 पंचायत दिघिया, बेला सिंगार मोती, मझारी, कुनौली, कमलपुर, डगमारा, हरियाही, मरौना के दो पंचायत सिसौनी व घोघरड़िया तथा बसंतपुर प्रखंड के 04 पंचायत भीमनगर, भगवानपुर, रतनपुर एवं सातनपट्टी शामिल हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 131 गांवों में बसी कुल 03 लाख 09 हजार 222 लोगों की आबादी बाढ़ की चपेट में है. इस दौरान सरकार द्वारा पीड़ितों व विस्थापितों को थोड़ी सी राहत सामग्री देकर खानापूरी कर दी जाती है.
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