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बिहार रेजिमेंट : देश पर संकट के समय रेजिमेंट के योद्धाओं ने हमेशा लहू से लिखी है वीरगाथा

By Prabhat Khabar Print Desk
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बिहार रेजिमेंट की वीरगाथा
बिहार रेजिमेंट की वीरगाथा
File Photo

पटना : देश पर जब- जब संकट आया बिहार के मूल निवासी सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया. पाकिस्तान के साथ 1965 - 1971 की लड़ाई से लेकर करगिल युद्ध में बिहार रेजीमेंट के सैनिकों ने शौर्य दिखाया है. स्थापना दिवस पर थल सेनाध्यक्ष राष्ट्रपति निशान प्रदान कर चुके है़ बिहार रेजिमेंट का सेंटर दानापुर में है़ यह छावनी क्षेत्र को देश देश के सबसे बड़े कैंटोनमेंट में शामिल है. जम्मू कश्मीर में उरी पर हुए आतंकी हमले में शहीद होने वाले 17 जवान में 15 बिहार रेजिमेंट के ही थे. बिहार रेजीमेंट के अधिकारी और जवान अपनी बहादुरी और उत्कृष्ट सेवा के लिये 350 से अधिक मेडल का सम्मान हासिल कर चुके हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के शांति काल में सर्वोच्च बहादुरी के लिये तीन अशोक चक्र, हासिल हैं. इसके अलावा 15 वीर चक्र, 41 शौर्य चक्र, 14 कीर्ति चक्र, आठ अति विशिष्ट सेवा मेडल, पांच युद्ध सेवा मेडल, 31 विशिष्ट सेवा मेडल, तीन जीवन रक्षक मेडल, 153 सेवा मेडल आदि शामिल हैं.

शहीदों की शहादत खाली नहीं जायेगी - स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने चीन के कायराना हरकत पर दुख जताते हुए कहा कि शहीदों की शहादत खाली नहीं जायेगी. बिहार समेत देश के 20 शहीद जवानों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए श्री पांडेय ने कहा कि संकट की इस घड़ी में केंद्र और राज्य सरकार शहीदों के परिजनों के साथ हैं. इस मामले में पूरा देश एकजुट है.उन्होंने कहा कि चीन के हमले का भारत मुंहतोड़ जवाब देगा.

शहीद होने का गम तो हमें गर्व भी है- राज्य के संसदीय कार्य और ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने राज्य सरकार की ओर से बिहार के सपूत शहीद सुनील कुमार के पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण कर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की. भारत-चीन की सीमा पर गलवन घाटी में चीनी सैनिकों से झड़प के बाद देश के लिए बिहार रेजिमेंट के सुनील कुमार ने अपने प्राणों को न्योछावर किया है. मंत्री श्रवण कुमार ने बुधवार की शाम पटना हवाई अड्डा पर बिहटा निवासी शहीद, सुनील कुमार के प्रति अपने शोक उद्गार में कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा. पूरे देश को बिहार के इस सपूत के शहीद होने का गम तो है, लेकिन गर्व भी है. इन्होंने चीनी सैनिकों का बहादुरी से मुकाबला किया, देश के लिए प्राण दिये.

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