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हिंदी के लिए शोध की नितांत आवश्यकता : डीएम

Updated at : 14 Sep 2025 8:23 PM (IST)
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हिंदी के लिए शोध की नितांत आवश्यकता : डीएम

रविवार को हिंदी दिवस के अवसर पर जिला सभागार में जिला पदाधिकारी डॉ आदित्य प्रकाश की अध्यक्षता में समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पदाधिकारी व पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार तिवारी सहित अन्य वरीय पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया.

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प्रतिनिधि, सीवान. रविवार को हिंदी दिवस के अवसर पर जिला सभागार में जिला पदाधिकारी डॉ आदित्य प्रकाश की अध्यक्षता में समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पदाधिकारी व पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार तिवारी सहित अन्य वरीय पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं वरीय पदाधिकारी व कर्मी सहित वक्ताओं ने वर्तमान परिपेक्ष में हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए अपनी बातों को रखा. हिंदी दिवस समारोह में वक्ताओं ने कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को देश की राजभाषा के रूप में अंगीकृत किया था. तभी से प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है. जिला पदाधिकारी ने हिंदी भाषा की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि सामान्य बोलचाल एवं कार्यालय कार्यों में इसके आधिकारिक उपयोग की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा मधुर सरस होने के साथ-साथ पूरे देश को एक सूत्र में बांधने हेतु एकमात्र विकल्प भी है. यह दिवस न केवल राजभाषा के रूप में हिन्दी की गौरवपूर्ण परंपरा का प्रतीक है, बल्कि सरकारी कार्यों एवं आम जीवन में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने का संकल्प दिवस भी है. जिला पदाधिकारी ने कहा कि हिंदी का भविष्य बेहद उज्जवल है. हालांकि कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं. मतलब हिंदी का रोजगारात्मक पहलू आदि हिंदी के उज्ज्वल भविष्य के लिए शोध की भी सिद्धांत आवश्यकता है. इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि हिंदी का भविष्य बेहद उज्ज्वल है. आवश्यकता है समर्पण एवं समन्वित और सकारात्मक प्रयासों की. कार्यक्रम का संचालन सामान्य शाखा प्रभारी वरीय उपसमाहर्ता शालू ने किया. मौके पर डभ्इओ राघवेंद्र प्रताप सिंह सहित डीपीआरओ कन्हैया कुमार व अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे. समारोह में हिन्दी के संवर्धन एवं शत-प्रतिशत प्रयोग को सुनिश्चित करने हेतु कई महत्वपूर्ण विचारणीय बिंदुओं पर चर्चा की गई. इनमें प्रमुख रूप से सभी प्रकार के मोहरों और सीलों पर हिन्दी उत्कीर्णन, सभी पदनाम पट्टिकाओं का हिन्दी में लेखन, सरकारी सेवकों द्वारा भ्रमण कार्यक्रमों की प्रस्तुति हिन्दी में, पुलिस केस डायरी एवं पत्राचार हिन्दी में, विज्ञापन एवं निविदा सूचना का प्रकाशन हिन्दी में, सभी प्रकार का पत्राचार, टिप्पण, चरित्री लेखन, नाम पट्ट एवं सूचना पट्ट का हिन्दी में लेखन, वाहनों पर हिन्दी नामपट्ट, प्रशासनिक अधिसूचनाएँ, आदेश, निदेश, कार्यवृत्त एवं प्रगति प्रतिवेदन का हिन्दी में प्रकाशन तथा न्यायालयों में वाद निष्पादन संबंधी आदेश हिन्दी में निर्गत करना शामिल है. इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि राजभाषा हिन्दी के प्रयोग से प्रशासनिक कार्य सरल, पारदर्शी एवं जनहितकारी बनते हैं. साथ ही, हिन्दी से जुड़ी उत्कृष्ट टिप्पणियां और कार्य प्रारूप प्रस्तुत करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को राजभाषा विभाग की ओर से पुरस्कृत करने हेतु अनुशंसा भी की जाएगी.समारोह का समापन हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं इसके निरंतर प्रयोग के संकल्प के साथ हुआ .

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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