सीवान में मानसून की बेरुखी से किसान बेहाल, नहरें सूखी, नलकूप भी बंद, जानिए कब से शुरु होगी बारिश

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सूखा पड़ा नहर

Siwan Mansoon Update: सीवान के भगवानपुर में बारिश नहीं होने से धान की खेती संकट में है. नहरें सूखी हैं और करीब 20 सरकारी नलकूप बंद पड़े हैं, जिससे किसान परेशान हैं.

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सीवान से रंजीत कुमार की रिपोर्ट
Siwan Mansoon Update:
सीवान जिले के भगवानपुर प्रखंड क्षेत्र में मानसून की बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. धान की नर्सरी यानी बिचड़ा तैयार करने का समय लगभग समाप्त होने को है, लेकिन खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से किसान धान की खेती को लेकर चिंतित हैं.

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सरकारी सिंचाई व्यवस्था किसानों का नहीं दे रही साथ

किसानों की सबसे बड़ी शिकायत सरकारी सिंचाई व्यवस्था को लेकर है. प्रखंड में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 20 सरकारी नलकूप मौजूद हैं, लेकिन इनमें से एक भी किसानों के काम नहीं आ रहा है. कई नलकूप वर्षों से खराब पड़े हैं, जबकि कुछ तकनीकी कारणों से बंद हैं. किसानों का कहना है कि जरूरत के समय ही सरकारी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति सामने आती है. कागजों में नलकूप मौजूद हैं, लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं है.

नहरों की स्थिति क्या है?

प्रखंड की प्रमुख नहरें भी इन दिनों सूखी पड़ी हैं. नहरों में पानी नहीं आने से हजारों एकड़ कृषि भूमि सिंचाई से वंचित है. किसानों का कहना है कि यदि समय पर नहरों में पानी छोड़ा जाता तो धान की नर्सरी तैयार करने में इतनी परेशानी नहीं होती. कई किसान अब तक बिचड़ा नहीं लगा पाए हैं, जबकि खेती का उपयुक्त समय तेजी से निकलता जा रहा है.

निजी बोरिंग और डीजल पंप से कितनी बढ़ रही है लागत?

कुछ किसानों ने निजी बोरिंग और डीजल पंप के सहारे किसी तरह धान का बिचड़ा तैयार किया है. हालांकि तेज धूप और उमस भरे मौसम के कारण फसलों को बचाए रखना चुनौती बन गया है. लगातार सिंचाई के लिए डीजल का उपयोग करने से खेती की लागत बढ़ रही है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह अतिरिक्त खर्च आर्थिक बोझ साबित हो रहा है.

किसानों ने क्या जताई आशंका?

किसानों का कहना है कि एक ओर बारिश नहीं हो रही है और दूसरी ओर सरकारी सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है. ऐसे में धान की खेती भगवान भरोसे चल रही है. उन्होंने आशंका जताई कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई पर भी संकट खड़ा हो सकता है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होगा.

कृषि पदाधिकारी ने क्या कहा?

इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी यदुनंदन वर्मा ने बताया कि प्रखंड में कितने सरकारी नलकूप हैं और कितने चालू हैं, इसकी जानकारी देखनी पड़ेगी. उन्होंने कहा कि नलकूपों की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी संबंधित विभाग के पास उपलब्ध है.

किसानों की क्या मांग है?

किसानों ने प्रशासन से बंद पड़े सरकारी नलकूपों को तत्काल चालू कराने और नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि शीघ्र सिंचाई की व्यवस्था नहीं की गई तो इस वर्ष धान की खेती बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने और सिंचाई व्यवस्था बहाल नहीं होने की स्थिति में धान उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

सीवान में कब आएगा मानसून

मौसम विभाग की मानें तो सीवान में मानसून की आधिकारिक तौर पर एंट्री जून के तीसरे या चौथे सप्ताह के दौरान होगी. जून के अंतिम सप्ताह में भारी बारिश की आशंका जताई जा रही है. मौसम विभाग की मानें को सीवान में जुलाई महीने में अच्छी बारिश हो सकती है.

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