नगर पंचायत बोर्ड कभी भी हो सकता है भंग

राज्य निर्वाचन आयोग, ने नगर पंचायत महाराजगंज के गठन और क्षेत्र विस्तार से जुड़े चुनावी मसले पर नगर विकास एवं आवास विभाग को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की है.
प्रतिनिधि, सीवान: राज्य निर्वाचन आयोग, ने नगर पंचायत महाराजगंज के गठन और क्षेत्र विस्तार से जुड़े चुनावी मसले पर नगर विकास एवं आवास विभाग को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की है. आयोग की ओर से सचिव मुकेश कुमार सिन्हा ने विभाग को अवगत कराया है कि नगर पंचायत, महाराजगंज का क्षेत्र बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 6 के तहत अधिसूचित किया गया है. इस अधिसूचना के बाद निर्वाचन कराना आवश्यक हो गया है. आयोग ने कहा है कि कानून के मुताबिक नयी नगरपालिका घोषित होने पर उस इलाके पर पहले से अधिकार रखने वाली संस्था अधिकतम छह महीने तक ही काम कर सकती है. इसके बाद नई इकाई के गठन के लिए चुनाव जरूरी है.लेकिन इस बीच कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही हैं. सबसे बड़ी चुनौती मतदाता सूची का अद्यतन है. विधान सभा चुनाव 2025 के कारण सभी जिलों में सरकारी मशीनरी पूरी तरह से व्यस्त रहेगी. ऐसे हालात में नगर पंचायत महाराजगंज का चुनाव कराना कठिन होगा.इसके साथ ही आयोग ने एक और अहम बिंदु की ओर ध्यान दिलाया है. वर्तमान में राज्य सरकार कई नगरपालिकाओं का उत्क्रमण, क्षेत्र विस्तार और नवसृजन की प्रक्रिया चला रही है. जब तक यह प्रक्रिया पूरी तरह से अंतिम रूप से अधिसूचित नहीं हो जाती तब तक मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद के पदों का आरक्षण तय नहीं किया जा सकता. आरक्षण तय होने के बाद ही चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 12(9) में यह प्रावधान है कि यदि किसी नगरपालिका का चुनाव निर्धारित समय में कराना संभव न हो तो वह इकाई स्वतः भंग मानी जाएगी और उसके लिए एक प्रशासक नियुक्त करना होगा. इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने नगर विकास एवं आवास विभाग से अनुरोध किया है कि समय पर नगर पंचायत महाराजगंज के लिए प्रशासक की नियुक्ति की जाए ताकि प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की रुकावट न हो और जनता को बुनियादी सुविधाएं मिलती रहें.आयोग ने यह साफ कर दिया है कि कानूनी प्रक्रिया और नियमों का पालन करते हुए ही आगे की कार्रवाई संभव है. ज्ञात हो कि पहले महाराजगंज नगर पंचायत में कुल 14 वार्ड थे. लेकिन क्षेत्र विस्तार के बाद वार्डों की संख्या बढ़कर 17 हो गई. इस विस्तार के तहत दो गांव जगदीशपुर और धनछुआ को नगर पंचायत में शामिल किया गया था. कुछ ही दिन पहले ही नगर पंचायत के मुख्य पार्षद शारदा देवी की कुर्सी भी होल्डिंग टैक्स नहीं जमा करने के मामला में चली गई थी. बताया जाता है कि जिलाधिकारी डॉ. आदित्य प्रकाश ने 30 जुलाई को ही राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव को वार्ड गठन और परिसीमन से संबंधित विस्तृत जानकारी भेज दी थी.इसके आधार पर आयोग आगे की प्रक्रिया में जुटा हुआ था.
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