सीवान में हिंदी दिवस पर संगोष्ठी, डीएम बोले- देश की एकजुटता का आधार है हिंदी

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हिंदी दिवस कार्यक्रम में उपस्थित जिला पदाधिकारी व अन्य | Prabhat Khabar Network

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सीवान के समाहरणालय में हिंदी दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। डीएम ने कहा कि आम जनता से सहज संवाद के लिए हिंदी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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Siwan News : हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को समाहरणालय सभागार में संगोष्ठी आयोजित की गयी. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा ने कहा कि देश की एकजुटता का आधार हिंदी है. विविधता में एकता के सूत्र में पिरोने वाली हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान भी है.

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उन्होंने कहा कि आम जनता के साथ सहज और सरल संवाद कायम करने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है. इससे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी मदद मिलती है. हिंदी के विकास और प्रोत्साहन के लिए सभी को अपनी सहभागिता निभानी चाहिए.

दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का किया गया शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस दौरान आगंतुक अतिथियों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया. मंच संचालन उदय सिंह सम्यक ने किया. संगोष्ठी में डीडीसी अमिताभ सिंह, एसडीएम आशुतोष गुप्ता समेत शहर के शिक्षाविद, साहित्यकार और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

तकनीकी विषयों में हिंदी के विकास पर दिया जोर

संगोष्ठी में डॉ. अशोक प्रियंवद ने कहा कि हिंदी के विकास की विडंबना यह है कि तकनीकी विषयों की भाषा के रूप में इसका अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है. उन्होंने हिंदी को तकनीकी और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्रों में भी मजबूत करने की जरूरत बतायी.

डॉ. हारून शैलेंद्र ने हिंदी को देश को जोड़ने वाली भाषा बताया. शायर सुनील कुमार तंग ने कहा कि हिंदी भावनाओं की भाषा है और इसे उसी स्वरूप में अपनाने की जरूरत है.

सीवान के योगदान को भी किया गया याद

स्वतंत्र पत्रकार सह सामाजिक कार्यकर्ता गणेश दत्त पाठक ने कहा कि हिंदी को राजभाषा बनाने में सीवान का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उन्होंने संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ बृजकिशोर प्रसाद, प्रभावती देवी और नारायण प्रसाद सिंह के योगदान को महत्वपूर्ण बताया.

डॉ. पूजा तिवारी ने हिंदी के निरंतर विकास की आवश्यकता पर विचार रखे. डॉ. राजेश पांडेय ने अनुवाद की संस्कृति को हिंदी के लिए नुकसानदायक बताया. डॉ. मन्नू राय ने हिंदी के विकास के लिए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करने पर जोर दिया.

बिहार गीत के श्रवण के साथ हुआ समापन

इस अवसर पर जाहिद सिवानी, राघव जी राय और प्रिंस तिवारी ने भी अपने विचार रखे. वक्ताओं ने हिंदी के व्यापक उपयोग, विकास और प्रोत्साहन पर जोर दिया. कार्यक्रम के अंत में बिहार गीत का श्रवण किया गया.

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