8,725 रुपये में परिवार चलाने की मजबूरी, डाटा एंट्री ऑपरेटरों की मांग पर जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज

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ऑपरेटर कार्य करते हुए. सांकेतिक तस्वीर

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बिहार के शिक्षा विभाग के डिजिटल सिस्टम को चलाने वाले डाटा एंट्री ऑपरेटर 8,725 रुपये जैसे अल्प मानदेय में काम कर रहे हैं. साढ़े आठ साल से सेवा देने के बावजूद न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन मिलने से वे आर्थिक तंगी झेल रहे हैं. इस गंभीर मुद्दे को अब सत्तारूढ़ दल के सचेतक और एक सांसद ने भी शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाया है.

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Education Department: बिहार के सभी 537 बीआरसी कार्यालयों में कार्यरत बीईडीएमसी डाटा एंट्री ऑपरेटर वर्षों से शिक्षा विभाग के डिजिटल और ऑनलाइन कार्यों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इसके बावजूद कम मानदेय मिलने के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने अपने पद पर समायोजन करने के साथ न्यूनतम मानदेय और वेतनमान का लाभ देने की मांग उठाई है.

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साढ़े आठ साल से कर रहे काम, मानदेय 8725 रुपये

डाटा एंट्री ऑपरेटरों का कहना है कि वे करीब साढ़े आठ वर्षों से अल्प मानदेय पर लगातार काम कर रहे हैं. शुरुआती करीब चार वर्षों तक उन्हें 6,164 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया गया. इसके बाद पिछले करीब साढ़े चार वर्षों से उन्हें 8,725 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है. ऑपरेटरों के अनुसार यह राशि न्यूनतम मजदूरी से भी कम है. लंबे समय से काम करने के बावजूद मानदेय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं होने से उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है.

सत्तारूढ़ दल के सचेतक ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र

इस मामले को सत्तारूढ़ दल के सचेतक सुधांशु शेखर ने भी उठाया है. उन्होंने शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर बिहार के सभी 537 बीआरसी कार्यालयों में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटरों को संविदा पर समायोजित करने और न्यूनतम मानदेय का भुगतान करने का अनुरोध किया है. जनप्रतिनिधि की ओर से मामला उठाए जाने के बाद ऑपरेटरों में अपनी मांगों को लेकर उम्मीद जगी है.

सांसद विजयलक्ष्मी देवी ने भी किया पत्राचार

डाटा एंट्री ऑपरेटरों की समस्याओं को लेकर सांसद विजयलक्ष्मी देवी की ओर से भी पत्राचार किए जाने की बात सामने आई है. इससे लंबे समय से मानदेय पर काम कर रहे कर्मचारियों की मांग को जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिलने की बात कही जा रही है.

डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की अहम कड़ी हैं ऑपरेटर

डाटा एंट्री ऑपरेटरों का कहना है कि वर्तमान समय में शिक्षा विभाग का अधिकांश काम ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से संचालित हो रहा है. बीईओ कार्यालय से लेकर बीआरसी स्तर तक पोर्टल पर डाटा अपलोड करने, ऑनलाइन रिपोर्टिंग, विद्यार्थियों और शिक्षकों से संबंधित आंकड़ों को अपडेट करने सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल कार्य इन्हीं ऑपरेटरों के माध्यम से पूरे किए जाते हैं.

ऑपरेटरों का दावा है कि किसी दिन डाटा एंट्री ऑपरेटर के अवकाश पर रहने से प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के डिजिटल कार्यों की गति प्रभावित होती है. इसके बावजूद वर्षों से सेवा दे रहे कर्मियों को महज 8,725 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है.

इतने कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल

ऑपरेटरों का कहना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में 8,725 रुपये प्रतिमाह में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है. वर्षों से शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण डिजिटल कार्यों को संभालने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है. इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है.

शिक्षा विभाग के बड़े बजट के बावजूद सवाल

डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने कहा कि बिहार सरकार के बजट में शिक्षा विभाग को प्रमुख स्थान दिया जाता है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल रूप से संचालित करने वाले कर्मियों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. उनका कहना है कि करीब नौ वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय और सेवा सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा है.

समायोजन और सेवा सुरक्षा की मांग

डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने सरकार और शिक्षा विभाग से उनके अनुभव और लगातार दी जा रही सेवाओं को देखते हुए संविदा पर समायोजन करने की मांग की है. इसके साथ न्यूनतम मानदेय, वेतनमान का लाभ और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है.

जनप्रतिनिधियों की ओर से शिक्षा मंत्री के समक्ष मामला उठाए जाने के बाद अब डाटा एंट्री ऑपरेटरों को सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है.

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