सीवान : 75 साल पुरानी परंपरा, बखरी आनंद बाग में 28 अगस्त से लगेगा संत मेला, लाखों श्रद्धालु जुटेंगे

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बखरी मठ स्थित मंदिर

Bakhri Anand Bagh Saint Fair : बिहार के सीवान में 28 अगस्त से दो दिवसीय संत मेले का आयोजन होने जा रहा है. करीब 75 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में इस बार दो लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. मेले की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं, जिसमें साफ-सफाई, सजावट और श्रद्धालुओं के ठहरने व भोजन की व्यवस्था शामिल है.

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Bakhri Anand Bagh Saint Fair : सीवान के सिसवन प्रखंड के बखरी गांव स्थित आनंद बाग एवं सुंदरबाग मठ में 28 अगस्त से दो दिवसीय संत मेला शुरू होगा. मेले की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं. मठ परिसर की साफ-सफाई और सजावट के साथ श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन, रोशनी और सुरक्षा की व्यवस्था की जा रही है. करीब 75 वर्षों से सावन पूर्णिमा पर लगने वाले इस मेले में इस बार करीब दो लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है.

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28 अगस्त से शुरू होगा दो दिवसीय संत मेला

बखरी गांव स्थित आनंद बाग एवं सुंदरबाग मठ में 28 अगस्त से दो दिवसीय संत मेले का आयोजन होगा. मेले को लेकर श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है. साधु-संत भी मठ परिसर में पहुंचने लगे हैं. आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह है.

अंतिम चरण में पहुंची मेले की तैयारी

मेले को लेकर मठ परिसर की साफ-सफाई और सजावट का काम पूरा किया जा रहा है. श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गयी है. पूरे बगीचे परिसर में टेंट लगाए जा रहे हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रोशनी की व्यवस्था भी दुरुस्त की गयी है.

करीब दो लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

मेले में इस वर्ष करीब दो लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया गया है. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए आयोजक सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटे हैं. प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है.

75 वर्षों से चली आ रही संत मेले की परंपरा

बखरी आनंद बाग में संत मेले का आयोजन करीब 75 वर्षों से लगातार सावन महीने की पूर्णिमा के अवसर पर होता आ रहा है. आनंदबाग में संत शिरोमणि श्रीजगन्नाथ दास और सुंदरबाग में साधक प्रवर श्रीभगवान दास की समाधि पर बने मंदिरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है.

देश के कई शहरों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

इस संत मेले में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों और शहरों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. दिल्ली, कोलकाता, आसनसोल, गोरखपुर, देवरिया, बलिया, जहानाबाद, आरा, नवादा और नालंदा समेत कई स्थानों से श्रद्धालुओं के आने की परंपरा रही है.

भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस तैनात

मेले में भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस बल की तैनाती की है. श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मेला परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस निगरानी रखेगी. आयोजन स्थल पर आने वाले लोगों की सुविधा को लेकर भी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं.

संत भगवान दास ने आनंद मठ को दिलाई पहचान

बखरी स्थित आनंदबाग मठ को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में संत श्रीभगवान दास का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है. उन्होंने ध्यान, योग, सुविचार और सद्भावना के माध्यम से लोगों को संस्कारवान बनाने का प्रयास किया. सुंदरबाग परिसर में उनकी समाधि स्थल पर भव्य मंदिर भी बना हुआ है.

सभी धर्मों से प्रेम और भाईचारे की सीख

संत श्रीभगवान दास का संदेश सभी धर्मों के प्रति प्रेम और आपसी भाईचारे से जुड़ा रहा. उनके विचारों और साधना से जुड़े लोग आज भी उनकी शिक्षाओं को याद करते हैं. आनंदबाग और सुंदरबाग मठ इसी आध्यात्मिक परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं.

पहले गुरु की पूजा, फिर होती है हनुमान आराधना

बखरी गांव स्थित दोनों मठों में पूजा-पाठ की एक अनोखी परंपरा है. यहां देवताओं की आराधना से पहले गुरु की पूजा की जाती है और इसके बाद हनुमान जी की आराधना होती है. यह परंपरा करीब 75 साल पुरानी बतायी जाती है.

अमावस्या और पूर्णिमा पर भी जुटती है भीड़

मठ परिसर में केवल संत मेले के दौरान ही नहीं, बल्कि प्रत्येक अमावस्या, पूर्णिमा, नवरात्रि और सावन के दौरान भी श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है. यहां आने वाले श्रद्धालु गुरु और हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना करते हैं.


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