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महाजन के तगादा की सता रही चिंता, पानी में डूबे धान के फसल को देख फट रहा किसानों का कलेजा

Updated at : 09 Oct 2025 10:23 PM (IST)
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महाजन के तगादा की सता रही चिंता, पानी में डूबे धान के फसल को देख फट रहा किसानों का कलेजा

विगत दिनों लगातार हुई भारी बारिश से प्रखंड क्षेत्र के भिट्ठा धरमपुर पंचायत एवं इसके आसपास का क्षेत्र बुरी तरह से बाढ़ प्रभावित हो चुका है.

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पुपरी. विगत दिनों लगातार हुई भारी बारिश से प्रखंड क्षेत्र के भिट्ठा धरमपुर पंचायत एवं इसके आसपास का क्षेत्र बुरी तरह से बाढ़ प्रभावित हो चुका है. भारी बारिश व नेपाल से आने वाले पानी के कारण अधवारा समूह की रातो, मरहा, धौंस व बुढ़नद नदी जलस्तर बढ़ गया है, जिसके चलते निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर गया है. पंचायत के बाधासाती, निहसा, डुम्हारपट्टी, बहिलबाड़ा, डुम्हारपट्टी, धरमपुर, मिरदी व भिट्ठा क्षेत्र में बाढ़ का पानी बरकरार है. इससे किसानों के फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. धान का फसल पानी में डूब कर बर्बाद हो चुका है. किसानों ने इसको लेकर सरकार से मुआवजे की मांग की है. बताया गया कि विगत बुधवार को बहिलवारा गांव में बाढ़ का पानी घुसने से हड़कंप मच गया. इसी बीच भिट्ठा धरमपुर पंचायत के डुम्हारपट्टी, निहसा और बाघासांती समेत अन्य गांवों में भी पानी फैल गया. ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से पुराने जमींदारी सुरक्षा बांध को बचाने की कोशिश की, पर तेज धार ने बांध को काट दिया. अब पूरा क्षेत्र गहरे पानी में डूबा हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत राहत कार्य व मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए. हालांकि एसडीओ स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं व सीओ को मौके पर जाकर स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया है.

बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया… अब खेत भी पानी में है और उम्मीद भी

किसान शंभु राम ने भावुक होते हुए कहा कि बाढ़ के इस कहर में किसानों की मेहनत और सपने डूब गए हैं. बहिलवारा गांव निवासी मनोज राम, अशोक राम, रजनीश कुमार, सुशील चौधरी, रामानुज पांडेय ने बताया कि उन्होंने गांव के ही ट्रैक्टर से उधार लेकर खेत जोतवा कर खेती की थी. बोरिंग व दमकल से पटवन करवाया था. वहीं, डुम्हारपट्टी निवासी रणजीत कुमार मुन्ना, नवीन कुमार चौधरी, जलेश्वर मंडल, शंभू राम, भोगी राय, मोहित साह, अवधेश चौधरी और सुनील चौधरी ने बताया कि उनकी धान की फसल तैयार होने की अवस्था में थी. इस बार फसल तैयार करने के लिए पंपिंग सेट से कई बार पटवन करवाया था. बरसात के समय बारिश न होने के कारण धान की खेती में अधिक लागत लगी थी. अब खेत और उम्मीद दोनों पानी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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