सीतामढ़ी में एंटी रैबीज टीके की किल्लत, 5000 की जगह मिले 700 वायल
सांकेतिक तस्वीर
सीतामढ़ी के सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज टीके की भारी किल्लत हो गई है. 5000 वायल की मांग पर केवल 700 ही उपलब्ध कराए गए, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. बाजार में महंगा होने के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
Sitamarhi News: सीतामढ़ी. जिले के सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज टीके की मांग बढ़ने के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. मांग के अनुपात में आपूर्ति नहीं होने के कारण अस्पताल प्रबंधन को टीके की उपलब्धता बनाए रखने में परेशानी हो रही है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मुजफ्फरपुर केंद्रीय भंडार से हाल में पांच हजार वायल एंटी रैबीज टीके की मांग की गयी थी, लेकिन इसके मुकाबले महज 700 वायल ही उपलब्ध कराये गये. इनमें से सदर अस्पताल को 200 वायल मिले हैं.
पांच हजार वायल की मांग पर अस्पतालों को मिले महज 700
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले के अस्पतालों में एंटी रैबीज टीके की जरूरत लगातार बनी हुई है. इसी को देखते हुए मुजफ्फरपुर केंद्रीय भंडार से पांच हजार वायल की मांग भेजी गयी थी. हालांकि, मांग के मुकाबले केवल 700 वायल ही उपलब्ध हो सके. सीमित आपूर्ति के कारण अस्पतालों में टीके का स्टॉक बनाए रखना चुनौती बन गया है.
सदर अस्पताल को उपलब्ध कराये गये सिर्फ 200 वायल
उपलब्ध 700 वायल में से सदर अस्पताल को 200 वायल दिये गये हैं. इससे अस्पताल प्रबंधन को जरूरत के अनुसार टीका उपलब्ध कराने में परेशानी हो रही है. इससे पहले भी तीन हजार वायल की मांग की गयी थी, लेकिन उस समय केवल 500 वायल की आपूर्ति की गयी थी. लगातार कम आपूर्ति के कारण सरकारी अस्पतालों में टीके की कमी हो जाती है.
बाजार में महंगा इंजेक्शन, मरीजों के सामने बढ़ी परेशानी
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ मनोज कुमार ने बताया कि एंटी रैबीज इंजेक्शन बाजार में भी उपलब्ध है, लेकिन इसकी कीमत अधिक होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी होती है. सरकारी अस्पतालों में टीका उपलब्ध रहने से जरूरतमंद लोगों को कम खर्च में उपचार मिल जाता है. ऐसे में सरकारी आपूर्ति पर्याप्त होना जरूरी है.
टीके को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां भी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एंटी रैबीज टीके की मांग बढ़ने के पीछे बीमारी को लेकर जागरूकता की कमी के साथ कई तरह की भ्रांतियां भी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ते या बिल्ली के केवल मामूली संपर्क या हर तरह की खरोंच को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है. वहीं, वास्तविक जोखिम होने पर टीकाकरण में देरी भी नहीं करनी चाहिए.
पशु के काटने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, रैबीज संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित पशु की लार के संपर्क से फैलता है. किसी पशु के काटने या घाव में उसकी लार के संपर्क की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए. लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार ही एंटी रैबीज टीके का इस्तेमाल करना चाहिए.
आवारा पशुओं के प्रति मानवीय व्यवहार की अपील
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आवारा कुत्तों और अन्य बेजुबान जानवरों के साथ मानवीय व्यवहार करने की अपील की है. उनका कहना है कि पशुओं के साथ हिंसा या दुर्व्यवहार करने से स्थिति और बिगड़ सकती है. लोगों को जागरूक रहकर जरूरत के अनुसार ही टीकाकरण कराना चाहिए, ताकि वास्तविक रूप से जरूरतमंद मरीजों को समय पर टीका मिल सके.
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