दूसरों को सुरक्षा देने वाली मेहसौल पुलिस खुद असुरक्षित

सीतामढ़ी : शहर के आम से लेकर खास लोगों को सुरक्षा देने वाली मेहसौल ओपी पुलिस खुद को असहज महसूस कर रही है. देश के अधिकांश प्रदेशों के पुलिस को हाइटेक बना दिया गया है, लेकिन अफसोस की बात है कि स्थानीय पुलिस को आज भी विपरित परिस्थितियों में ही ड्यूटी करनी पड़ती है. मेहसौल […]
सीतामढ़ी : शहर के आम से लेकर खास लोगों को सुरक्षा देने वाली मेहसौल ओपी पुलिस खुद को असहज महसूस कर रही है. देश के अधिकांश प्रदेशों के पुलिस को हाइटेक बना दिया गया है, लेकिन अफसोस की बात है कि स्थानीय पुलिस को आज भी विपरित परिस्थितियों में ही ड्यूटी करनी पड़ती है.
मेहसौल ओपी की बात करें, तो ब्रिटिस सरकार के जमाने वाले जर्जर हो चुके भवन में ओपी चलाया जा रहा है. अन्य मौसम में तो जैसे-तैसे दिन कट जाते हैं, लेकिन बारिश का मौसम आते ही ओपी में तैनात पुलिस पदाधिकारियों व कर्मियों पर सामत आ जाती है. पुलिस अपनी ही सुरक्षा के लिए परेशान हो जाती है. छत से पानी का रिसाव होने के कारण कार्यालय भी सुरक्षित नहीं है. आये दिन छत का चट गिरता रहता है, जिससे पुलिस भयभीत रहती है.
कमरे में घुस जाता है बारिश व नाले का पानी
पुलिस पदाधिकारियों के रहने के लिए एक करकटनुमा भवन है, जिसके उपर से बारिश का पानी और नीचे से नाले का पानी पदाधिकारियों के कमरे में भर जाता है. जहां सोना तो दूर, बैठ पाना भी मुश्किल होता है. ओपी परिसर भी बारिश व नाले के पानी से पट जाता है. नाले के पानी के साथ परिसर में बाहर से आये कचड़ों का अंबार लग जाता है, जिसकी बदबू से ओपी परिसर में रहना मुश्किल हो जाता है. जवानों को सांप व बिच्छू काटने का डर सताने लगता है.
सांप-बिच्छू के डर से नहीं सो पाते हैं जवान
ओपी प्रभारी मो औरंगजेब आलम ने बताया कि ओपी में उनके अलावा तीन पुलिस पदाधिकारी व करीब 10 से भी अधिक गृह रक्षा वाहिनी का जवान कार्यरत हैं. अधिकांश पदाधिकारी व होमगार्ड जवान ओपी में ही रहते हैं. कार्यरत पुलिस पदाधिकारियों व होमगार्ड जवानों का कहना था कि दिन-रात ड्यूटी करनी पड़ती है. जब कभी सोने का मौका मिलता है, तो कमरे की नारकीय व्यवस्था व सांप-बिच्छू व छत गिरने का डर चैन से सोने नहीं देता है.
ओपी परिसर में लगा पानी.
डेढ़ वर्ष बाद भी नहीं निकला समाधान : यहां बता दें कि वर्तमान एसपी हरि प्रसाथ एस जब जिले का कमान संभाले थे, तब उन्होंने मेहसौल ओपी का निरीक्षण किया था और माना था कि ओपी की व्यवस्था बदतर है. उन्होंने स्थिति को सुधारने का भरोसा दिलाया था. करीब डेढ़ वर्ष बीत गये, लेकिन ओपी में कार्यरत पुलिस पदाधिकारियों व होमगार्ड जवानों की समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जा सका है.
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