शेखपुरा में 30 जून तक चलेगा राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान', वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए जीरो बजट प्राकृतिक खेती के टिप्स
Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 05 Jun 2026 5:11 PM
बैठक में किसान
Sheikhpura Farmers Campaign: शेखपुरा के कोसरा पंचायत में कृषि विज्ञान केंद्र और आत्मा के संयुक्त प्रयास से 'खेत बचाओ अभियान' का आगाज हुआ. वैज्ञानिकों ने रासायनिक खाद के दुष्प्रभावों और प्राकृतिक खेती के फायदों के बारे में बताया. पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें.
Sheikhpura Farmers Campaign: देश भर में मिट्टी की सेहत सुधारने और फसलों की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 1 से 30 जून तक के राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत बिहार के शेखपुरा जिले में गतिविधियां तेज हो गई हैं. शुक्रवार, 5 जून 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), शेखपुरा एवं आत्मा (ATMA) के संयुक्त तत्वाधान में जिले के कोसरा पंचायत अंतर्गत गंगटी ग्राम में एक विशेष किसान जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में इलाके के 50 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लेकर कृषि जगत की नवीनतम तकनीकों की जानकारी हासिल की.
रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक और संतुलित उपयोग की सलाह
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान इंजीनियर प्रमोद कुमार चौधरी ने आगामी 30 जून तक पूरे शेखपुरा जिले में चलने वाले इस विशेष अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा की. उन्होंने किसानों को जागरूक करते हुए आगामी खरीफ सीजन की मुख्य फसलों जैसे धान, अरहर और अन्य पोषक अनाजों में रासायनिक उर्वरकों के संतुलित और सीमित उपयोग पर विशेष जोर दिया. उन्होंने बताया कि रासायनिक खादों के अत्यधिक और असंतुलित इस्तेमाल से न सिर्फ मिट्टी की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी इसके गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं. इससे बचने के लिए उन्होंने किसानों को खेतों में ‘ढैचा’ के प्रयोग से हरित खाद तैयार कर पैदावार में प्राकृतिक रूप से वृद्धि करने के वैज्ञानिक तरीके सिखाए.
गोबर और गौमूत्र से होगी ‘जीरो बजट प्राकृतिक खेती’, लाभदायक जीवाणु बदलेंगे मिट्टी की सूरत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध उद्यान वैज्ञानिक श्री नवीन कुमार सिंह ने किसानों को पारंपरिक खेती छोड़कर ‘प्राकृतिक खेती’ (Natural Farming) की आधुनिक तकनीक को अपनाने की पुरजोर वकालत की. उन्होंने किसानों को समझाया कि प्राकृतिक खेती असल में एक ‘जीरो बजट खेती’ है, जिसमें बाजार से महंगी खाद या कीटनाशक खरीदने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती.
किसान अपने घर में ही आसानी से उपलब्ध संसाधनों जैसे, गाय का गोबर, गौमूत्र, बेसन, गुड़ और पीपल के पेड़ के नीचे की उपजाऊ मिट्टी के मिश्रण से ‘जीवामृत’ तैयार कर सकते हैं. यह तरीका खेत को प्रचुर पोषण देने के साथ-साथ मिट्टी में लाभदायक केंटुओं और सूक्ष्म जीवाणुओं की संख्या को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे लागत न्यूनतम और मुनाफा अधिकतम होता है.
सरकारी कृषि योजनाओं की खुली खिड़की, अधिकारियों ने दी विस्तृत जानकारी
इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान सहायक तकनीकी प्रबंधक (ATM) श्री अश्वनी कुमार ने कृषि विभाग द्वारा बिहार सरकार और केंद्र सरकार के सहयोग से किसानों के हित में चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी व अनुदान योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी, ताकि किसान समय पर इनका लाभ उठा सकें.
इस विशेष अवसर पर कृषि समन्वयक श्रीमती प्रियंका एवं किसान सलाहकार श्रीमती खुशबू ने भी उपस्थित होकर खेती को सुगम बनाने को लेकर अपने महत्वपूर्ण विचार और जमीनी अनुभव साझा किए. कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी किसानों ने यह संकल्प लिया कि वे अपनी मिट्टी को बचाने के लिए रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करेंगे और जैविक व प्राकृतिक संसाधनों को बढ़ावा देंगे.
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