शेखपुरा में 11 साल पुराने अपहरण केस में आया फैसला, दो दोषियों को 3-3 साल की सजा, जानिए पूरा मामला

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शेखपुरा जिला न्यायालय

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Sheikhpura Kidnapping Case : शेखपुरा की अदालत ने 11 साल पुराने अपहरण मामले में दो दोषियों को तीन-तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. ठेकेदारी विवाद के चलते हुए इस अपहरण में फैसला आने के बाद दोषियों को जमानत मिल गई है.

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Sheikhpura Kidnapping Case : शेखपुरा में 11 साल पुराने अपहरण के मामले में कोर्ट ने दो दोषियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. प्रधान जिला जज संतोष कुमार तिवारी की अदालत ने दोनों को दोषी करार देने के बाद यह सजा सुनाई. दोनों दोषी नालंदा जिले के हरनौत थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं. सजा के बाद उन्हें जमानत की सुविधा दी गई, ताकि वे कानूनी प्रावधानों के तहत उच्च न्यायालय में दोषसिद्धि को चुनौती दे सकें.

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प्रधान जिला जज ने सुनाया फैसला

दरअसल, शेखपुरा के प्रधान जिला जज संतोष कुमार तिवारी ने अपहरण के 11 साल पुराने मामले में नालंदा जिले के दो लोगों को दोषी पाते हुए तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. दोनों को मंगलवार 15 सितंबर को दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था.

कड़ी सुरक्षा में कोर्ट पहुंचे दोनों दोषी

गुरुवार को सजा की अवधि पर सुनवाई के लिए दोनों दोषियों को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश किया गया. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने दोनों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई.

सजा के बाद मिली जमानत

सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को जमानत की सुविधा दी गई. अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह सुविधा कानूनी प्रावधानों के तहत दी गई, ताकि दोनों दोषी अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील कर सकें.

ठेकेदारी विवाद में हुआ था अपहरण

जिला लोक अभियोजक उदय नारायण सिंहा और अपर लोक अभियोजक शंभू शरण प्रसाद सिंह ने बताया कि मामला 2 अक्टूबर 2015 का है. ठेकेदारी से जुड़े विवाद को लेकर हरनौत थाना क्षेत्र के कन्हैया महतो और सुधीर राम पर शेखपुरा जिले के केवटी थाना क्षेत्र के काबिलगंज गांव निवासी हीरा चौधरी के अपहरण का आरोप था.

पहले से मिल रही थी जान से मारने की धमकी

अभियोजन के मुताबिक, अपहरण से पहले ही हीरा चौधरी को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं. घटना वाले दिन देर शाम तक उनके घर नहीं लौटने पर उनकी पत्नी दुर्गा देवी ने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई.

पुलिस ने अपहृत व्यक्ति को कराया मुक्त

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अपहृत हीरा चौधरी को मुक्त कराया. इसके बाद अनुसंधान पूरा कर आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया.

अभियोजन ने कड़ी सजा की मांग की

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्य पेश किए. जिला लोक अभियोजक और अपर लोक अभियोजक ने प्रभावी तरीके से पक्ष रखते हुए दोषियों को अपराध के लिए कड़ी सजा देने की मांग की.

बचाव पक्ष ने कम सजा देने की अपील की

वहीं, दोषसिद्ध व्यक्तियों की ओर से अधिवक्ता ने अदालत से रहम की गुहार लगाई. बचाव पक्ष ने दोषियों को कम से कम सजा देने का अनुरोध किया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई.

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