शिवहर: फलदार बगीचों में हल्दी की खेती से कमाएं दोगुना मुनाफा, कृषि विज्ञान केंद्र ने दी नई तकनीक
Published by : सुनील कुमार सिंह Updated At : 03 Jun 2026 6:10 AM
हल्दी की उन्नत किस्मों का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन
Sheohar News: कृषि विज्ञान केंद्र ने बागवानी के साथ हल्दी की अंतरवर्तीय खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शन आयोजित किया.पूसा द्वारा विकसित राजेंद्र सोनिया और राजेंद्र सोनाली जैसी उन्नत किस्में कम धूप में भी बंपर पैदावार देकर किसानों की आय बढ़ाएंगी. जानिए पूरी खबर…
शिवहर से मनीष नंदन सिंह की रिपोर्ट
Sheohar News: जिला कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा पिपराही प्रखंड के मिनापुर बलहा गांव में बागवानी आधारित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए हल्दी की उन्नत किस्मों का अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किया गया.इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को फलदार बगीचों के बीच खाली पड़ी जमीन का सही उपयोग कर अतिरिक्त आय कमाने की तकनीक सिखाना है.
कम धूप में भी बंपर पैदावार देंगी ये किस्में
केंद्र की वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने बताया कि इस प्रदर्शन के लिए राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा द्वारा विकसित ‘राजेंद्र सोनिया’ और ‘राजेंद्र सोनाली’ किस्मों को चुना गया है.ये किस्में कम प्रकाश यानी छायादार जगहों पर भी बेहतरीन उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं.बागवानी आधारित अंतरवर्तीय खेती अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं.
राजेंद्र सोनिया और राजेंद्र सोनाली की खासियतें
राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित राजेंद्र सोनिया एक उच्च उपज देने वाली हल्दी की किस्म है.इसकी उपज क्षमता 400-450 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, करक्यूमिन की मात्रा 7.5-8.0 प्रतिशत तथा फसल अवधि 200-210 दिन होती है.यह पत्ती धब्बा एवं लीफ ब्लॉच रोगों के प्रति प्रतिरोधी मानी जाती है.वहीं दूसरी ओर राजेंद्र सोनाली की उपज क्षमता 500-550 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.इसमें करक्यूमिन की मात्रा 6-7 प्रतिशत तथा फसल अवधि लगभग 215-220 दिन होती है.यह भी प्रमुख पर्ण रोगों के प्रति प्रतिरोधी है तथा उच्च उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है.
खाली पड़ी भूमि का होगा बेहतर उपयोग
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक डॉ. सौरभ शंकर पटेल ने कहा कि फलदार बगीचों में हल्दी की अंतरवर्तीय खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है.इससे बगीचे की खाली भूमि का बेहतर उपयोग होता है तथा किसानों को कम लागत में अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त होता है.जिला कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों से जोड़ने तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग हेतु इस प्रकार के प्रदर्शन कार्यक्रम निरंतर संचालित किए जा रहे हैं.
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By सुनील कुमार सिंह
सुनील कुमार सिंह प्रभात खबर मल्टीमीडिया में डिप्टी चीफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। क्राइम और राजनीति से जुड़ी खबरों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वे निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं, जिससे पाठकों को सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिलती है।
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