शिवहर: तरियानी में किसान जागरूकता कार्यक्रम, वैज्ञानिकों ने बताई टिकाऊ खेती की तकनीक

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Farmers attending a soil health and sustainable agriculture awareness program under Khet Bachao Abhiyan in Rajadih village of Sheohar district.

कार्यक्रम में मौजूद किसान और कृषि विशेषज्ञ

तरियानी प्रखंड के राजाडीह गांव में खेत बचाओ अभियान के तहत किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में 150 से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, नैनो उर्वरकों के उपयोग और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई. पढ़ें पूरी खबर…

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तरियानी (शिवहर) से मधुरेंद्र कुमार की रिपोर्ट

Sheohar News: खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत तरियानी प्रखंड के राजाडीह गांव में कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर एवं आत्मा शिवहर के संयुक्त तत्वावधान में किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया.

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, टिकाऊ कृषि पद्धतियों तथा प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना था. क्षेत्र में सब्जी एवं धान आधारित खेती की प्रमुखता को देखते हुए किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी गई.

आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि बचाना जरूरी

कार्यक्रम में उपस्थित नाबार्ड के डीडीएम ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती केवल वर्तमान उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना भी हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार के उपायों की भी जानकारी दी.

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग पर चर्चा

कृषि विज्ञान केंद्र शिवहर की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनुराधा रंजन कुमारी ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन, नैनो यूरिया तथा नैनो डीएपी के वैज्ञानिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि किसान पंजीकरण के माध्यम से किसानों का प्रमाणित डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्हें विभिन्न कृषि योजनाओं, अनुदान, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड तथा अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा.

उन्होंने किसानों से समय पर फार्मर रजिस्ट्री कराने की अपील भी की.

किसानों के सवालों का विशेषज्ञों ने दिया जवाब

कार्यक्रम के दौरान मृदा स्वास्थ्य, उर्वरक प्रबंधन, धान की सीधी बुवाई तथा सरकारी योजनाओं से संबंधित कई प्रश्न किसानों द्वारा पूछे गए, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया.

कार्यक्रम के अंत में किसानों से खेतों की उर्वरता बनाए रखने, जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की गई. वक्ताओं ने कहा कि खेत बचाओ अभियान को जन आंदोलन का रूप देकर खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है.

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