रोहतास में 12 लाख का कर्ज नहीं चुकाया तो मकान सील, परिवार के सामने हुई तालाबंदी; 4000 बकायेदारों पर कार्रवाई की तैयारी
बिक्रमगंज पानी टंकी मुहल्ले के इसी मकान को बैंक द्वारा सील करने की कार्रवाई हुई | Prabhat Khabar Network
बिक्रमगंज में बैंक ऋण न चुकाने पर मकान सील, 4000 बकायेदारों पर प्रशासन की नजर। जानें क्या है पूरी कानूनी प्रक्रिया और बैंक की सख्त कार्रवाई की तैयारी।
Rohtas News : बिक्रमगंज के पानी टंकी मुहल्ले में मंगलवार को केनरा बैंक से लिये गये करीब 12 लाख रुपये के ऋण का भुगतान नहीं करने पर प्रशासन ने एक मकान को सील कर तालाबंदी कर दी. कार्रवाई के दौरान मकान में मौजूद लोग रोते-बिलखते रहे और उन्हें कमरा छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. बैंक प्रतिनिधियों के अनुसार ऋण वसूली की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जिलाधिकारी रोहतास के आदेश पर यह कार्रवाई की गयी.
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भारी पुलिस बल के बीच मकान पर हुई तालाबंदी
मकान को सील करने की कार्रवाई भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करायी गयी. बीडीओ सुनील कुकर गौतम और सीओ आनंद की मौजूदगी में प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई पूरी की. मकान में तालाबंदी के बाद ऋण बकायेदारों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है.
4000 से अधिक बकायेदारों पर कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों के अनुसार अनुमंडल क्षेत्र में ऐसे ही 4000 से अधिक बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है. प्रक्रिया अनुमंडल कार्यालय की नीलाम पत्र प्रशाखा के स्तर से आगे बढ़ायी जा रही है. इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत दुकान, कारोबार या स्टार्टअप के लिए ऋण लेने वालों के साथ कृषि कार्य के लिए कर्ज लेने वाले लोग भी शामिल हैं.
नोटिस के बाद भी भुगतान नहीं तो बढ़ेगी कार्रवाई
लंबे समय से ऋण और ब्याज की राशि का भुगतान नहीं करने तथा बैंक से संपर्क नहीं रखने वाले ऋणधारकों के खिलाफ संबंधित बैंकों ने अनुमंडल न्यायालय में मामले प्रस्तुत किये हैं. ऐसे मामलों में पहले बकायेदारों को नोटिस भेजा जाता है. नोटिस के बाद भी यदि बकायेदार अपना पक्ष रखने नहीं आते या बकाया राशि चुकाने की दिशा में कदम नहीं उठाते हैं, तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. सूत्रों के अनुसार कई मामलों में बॉडी वारंट जारी करने की तैयारी भी चल रही है.
ऋण वितरण में बिचौलियों की भूमिका की जांच की उठी मांग
अधिवक्ता मदन सिंह ने कहा कि ऋण वसूली के साथ ऋण वितरण प्रक्रिया की भी जांच जरूरी है. बैंक और प्रशासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी योजनाओं का ऋण वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर ऋण दिलाने के नाम पर कथित बिचौलियों द्वारा 20 से 25 प्रतिशत तक कमीशन लेने की शिकायतें सामने आती रही हैं. इन शिकायतों की जांच होनी चाहिए.
समय पर किस्त चुकाना वित्तीय जिम्मेदारी भी
मदन सिंह ने कहा कि ऋण मुफ्त की रकम नहीं है. इसका उद्देश्य रोजगार, कारोबार और आमदनी बढ़ाना है. किस्त चुकाने में परेशानी होने पर बैंक से संपर्क कर समाधान तलाशना चाहिए. समय पर ऋण का भुगतान वित्तीय अनुशासन के साथ जिम्मेदारी भी है. मंगलवार की कार्रवाई के बाद अब करीब 4000 बकायेदारों की सूची और उनके मामलों में होने वाली संभावित कार्रवाई पर नजर है.

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