नन्ही जिंदगी की बड़ी जीत! मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना से 185 बच्चों को मिला नया जीवन, ऑपरेशन के बाद लौटी मुस्कान

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अस्पताल में उपस्थित लाभुक

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए स्वास्थ्य जांच और उपचार सुनिश्चित कर रहा है. सारण जिले में 2.31 लाख से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग में 120 बच्चों की मुफ्त सर्जरी सफल रही.

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Bal Hriday Yojana: हर मां-बाप की सबसे बड़ी इच्छा होती है कि उनका बच्चा स्वस्थ रहे और खुलकर हंसे-खेले. लेकिन कई बार जन्मजात बीमारी, दिल में छेद, कटे-फटे होंठ, पैर की विकृति, कुपोषण या शारीरिक और मानसिक विकास में देरी जैसी समस्याओं की समय पर पहचान नहीं हो पाती. आर्थिक तंगी और जानकारी के अभाव में कई परिवार इलाज तक नहीं पहुंच पाते. ऐसे बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम यानी आरबीएसके महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

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आरबीएसके की मोबाइल स्वास्थ्य टीमें खुद आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों तक पहुंचकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं. जांच के दौरान बीमारी या जन्मजात समस्या की आशंका मिलने पर बच्चों को आगे की जांच और उपचार के लिए जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र यानी डीईआईसी भेजा जाता है.

2,548 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुई बच्चों की स्क्रीनिंग

डीपीएम अरविंद कुमार ने बताया कि सारण जिले में अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच आरबीएसके के तहत 2,548 आंगनबाड़ी केंद्रों को कवर किया गया. इस दौरान दो लाख 31 हजार से अधिक बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गयी. स्क्रीनिंग के बाद 4,178 बच्चों को डीईआईसी छपरा रेफर किया गया. इनमें 221 बच्चों में विभिन्न बीमारियों की पहचान की गयी, जबकि 120 बच्चों की नि:शुल्क सफल सर्जरी करायी जा चुकी है.

बाल हृदय योजना से 34 बच्चों की हुई सर्जरी

जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना बड़ी मदद साबित हो रही है. योजना के तहत जरूरतमंद बच्चों के हृदय रोग का इलाज और सर्जरी नि:शुल्क कराने की व्यवस्था है. सारण जिले में अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच 34 बच्चों की हृदय सर्जरी करायी जा चुकी है.

वहीं, वर्ष 2021 से जुलाई 2026 तक 185 बच्चों के दिल में छेद का सफल सर्जिकल उपचार कराया गया है. गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के परिवारों को आर्थिक परेशानी नहीं हो, इसके लिए सरकारी स्तर से आवश्यक सहयोग भी दिया जाता है. जरूरत के अनुसार बच्चे को घर से अस्पताल, पटना और विशेषज्ञ उपचार केंद्र तक पहुंचाने में भी मदद की जाती है.

जन्म से 18 वर्ष तक बच्चों की होती है स्वास्थ्य जांच

आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. जितेंद्र प्रसाद ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है. कार्यक्रम में चार प्रमुख श्रेणियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिन्हें 4-डी कहा जाता है. इसमें जन्मजात दोष, बीमारियां, पोषण संबंधी कमियां और विकास में देरी शामिल हैं.

जन्मजात हृदय रोग, कटे-फटे होंठ और तालू, पैर की विकृतियां, कुपोषण, एनीमिया और बच्चों के शारीरिक या मानसिक विकास में देरी जैसी समस्याओं की पहचान की जाती है. जरूरत के अनुसार बच्चों को जांच, उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाती है.

जिले में काम कर रहीं 30 मोबाइल स्वास्थ्य टीमें

सारण जिले में कुल 30 आरबीएसके मोबाइल स्वास्थ्य टीमें कार्यरत हैं. ये टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों, सरकारी स्कूलों और निर्धारित डिलीवरी प्वाइंट पर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती हैं. आरबीएसके के तहत करीब 45 तरह की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और उपचार की व्यवस्था की गयी है.

स्क्रीनिंग के दौरान गंभीर बीमारी या जन्मजात समस्या की आशंका मिलने पर बच्चे को डीईआईसी भेजा जाता है. यहां विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद जरूरत पड़ने पर बच्चे को उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रेफर किया जाता है.

एक स्क्रीनिंग से बदल सकती है बच्चे की जिंदगी

कई बच्चों के इलाज की शुरुआत किसी बड़े अस्पताल से नहीं, बल्कि गांव या मोहल्ले के आंगनबाड़ी केंद्र से होती है. आरबीएसके की टीम वहां पहुंचकर बच्चे की जांच करती है. बीमारी की आशंका होने पर उसे आगे की जांच के लिए रेफर किया जाता है. डीईआईसी में जांच के बाद जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ उपचार और सर्जरी की सुविधा मिलती है. इस तरह समय पर हुई सामान्य स्वास्थ्य जांच कई बार बच्चे के भविष्य की दिशा बदल सकती है.

लाभार्थी बोलीं- सरकारी योजना ने दिया सहारा

दिघवारा की रहने वाली पूजा देवी ने बताया कि शुरुआत में उन्हें बच्चे की बीमारी की गंभीरता का पता नहीं था. जांच के दौरान समस्या की जानकारी मिलने के बाद चिंता हुई कि इलाज और ऑपरेशन का खर्च कैसे उठाएंगे. सरकारी व्यवस्था के माध्यम से जांच से लेकर आगे के इलाज की प्रक्रिया में मदद मिली. इलाज के बाद बच्चे की सेहत में सुधार देखकर पूरे परिवार को राहत मिली है.

उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इस तरह की सुविधा बड़ी मदद से कम नहीं है. अगर समय पर बीमारी की पहचान नहीं होती, तो इलाज में देरी हो सकती थी.

अहमदाबाद में बिना खर्च हुआ दिल में छेद का ऑपरेशन

रिविलगंज प्रखंड के शैलेंद्र कुमार यादव ने बताया कि उनके बच्चे को पहले सामान्य कमजोरी समझकर वे ज्यादा ध्यान नहीं देते थे. आरबीएसके की टीम ने जांच की और आगे इलाज के लिए रेफर किया. जांच में पता चला कि बच्चे के दिल में छेद है.

उन्होंने बताया कि सरकारी योजना के तहत जांच और इलाज की सुविधा मिली. अहमदाबाद में बिना किसी खर्च के बच्चे के दिल में छेद की सर्जरी हुई. आने-जाने, रहने और खाने तक की सुविधा भी नि:शुल्क उपलब्ध करायी गयी.

अधिकारी बोले- समय पर पहचान ही कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य

सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि आरबीएसके का मुख्य उद्देश्य बच्चों में स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित उपचार से जोड़ना है. इसके लिए मोबाइल स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचकर बच्चों की स्क्रीनिंग कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि कई बीमारियों के शुरुआती लक्षण परिजनों को सामान्य लगते हैं. नियमित स्क्रीनिंग से ऐसी समस्याओं की समय पर पहचान की जा सकती है. गंभीर मामलों को डीईआईसी और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा संस्थानों से जोड़कर बच्चों को नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है.

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