‘ज्ञान से कीमती दुनिया में कोई चीज नहीं’, सारण में चित्राली उपाध्याय के प्रवचन सुनने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Published by : Sakshi kumari Updated At : 31 May 2026 12:57 PM

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प्रवचन देते चित्राली उपाध्याय

Saran News: सारण जिले के मढ़ौरा स्थित शिल्हौरी धाम मंदिर में आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाई.

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Saran News: (सारण से मनोकामना सिंह की रिपोर्ट)
सारण जिले के मढ़ौरा स्थित शिल्हौरी धाम मंदिर में आयोजित श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाई. कथा वाचिका चित्राली उपाध्याय ने अपने प्रवचन में ज्ञान, भक्ति, प्रेम और धर्म के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार में ज्ञान से अधिक मूल्यवान कोई वस्तु नहीं है.

जहां पवित्र भाव-वहीं मंदिर का वास

कथा के दौरान चित्राली उपाध्याय ने कहा कि मन में पवित्रता और श्रद्धा हो तो जहां व्यक्ति बैठता है, वही स्थान मंदिर बन जाता है. उन्होंने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति समर्पण और सच्चे अनुराग से ही संभव है. केवल बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि आंतरिक भक्ति ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करती है.

धन से सुविधा मिलती है-सुख नहीं

उन्होंने कहा कि धन जीवन में सुविधाएं तो दे सकता है, लेकिन वास्तविक सुख नहीं दे सकता. धन का सदुपयोग उसे वंदनीय बनाता है, जबकि दुरुपयोग उसे निंदनीय बना देता है. जीवन में स्थायी सुख और शांति के लिए धर्म और आध्यात्मिकता का सहारा लेना आवश्यक है.

भक्ति से बड़ा होता है व्यक्ति

कथा वाचिका ने कहा कि भक्ति व्यक्ति को महान बनाती है और अच्छे गुण तथा श्रेष्ठ कर्म ही सम्मान दिलाते हैं. उन्होंने कहा कि सुख का मूल मंत्र धर्म है और भगवान की कृपा के बिना सच्ची भक्ति संभव नहीं हो सकती.

संतों के सान्निध्य से होता है जीव का कल्याण

चित्राली उपाध्याय ने कहा कि परमात्मा तत्व की प्राप्ति भक्ति से होती है, जबकि जीव का कल्याण संतों के सान्निध्य और उनके मार्गदर्शन से संभव है. उन्होंने श्रद्धालुओं से सत्संग और धार्मिक कथाओं को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया.

प्रेम सभी धर्मों की नींव

प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि प्रेम सभी धर्मों की आधारशिला है और हर मजहब आपसी प्रेम व भाईचारे का संदेश देता है. उन्होंने कहा कि यदि प्रेम सीखना हो तो भगवान श्रीराम से सीखें और विश्वास की मिसाल माता सीता से ग्रहण करें. उन्होंने कहा कि संसार में ज्ञान से अधिक मूल्यवान कोई चीज नहीं है. ज्ञान के बिना वैराग्य संभव नहीं और गुरु के बिना सच्चे ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती. इसलिए जीवन में गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है.

सत्संग और कथा हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी

चित्राली उपाध्याय ने कहा कि सत्संग और धार्मिक कथाएं केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं. इससे जीवन को सही दिशा मिलती है और नैतिक मूल्यों का विकास होता है. इस अवसर पर मुरारी स्वामी, संत शत्रुघ्न दास जी महाराज, फलहारी बाबा, आचार्य आलोक उपाध्याय, पंडित डॉ. जितेंद्र कुमार, राजेश उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे. महायज्ञ परिसर में पूरे दिन भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा.

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लेखक के बारे में

By Sakshi kumari

साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

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