सारण में अनीमिया के खिलाफ बड़ा अभियान: 25 अगस्त से 30 नवंबर तक चलेगा विशेष शिविर, रोजाना 9,900 लोगों की जांच का लक्ष्य

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बैठक की तस्वीर

सारण जिले में 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक अनीमिया (खून की कमी) के खिलाफ एक विशेष जांच और उपचार अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान का लक्ष्य लाखों लोगों की स्क्रीनिंग करना है, जिसमें किशोरियों और महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी. यह अभियान मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.

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Anemia Mukt Bharat: थकान, कमजोरी, चक्कर और लगातार सुस्ती को अक्सर सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन इसके पीछे अनीमिया यानी खून की कमी जैसी गंभीर समस्या हो सकती है. खासकर किशोरियों, गर्भवती और प्रजनन आयु की महिलाओं में अनीमिया मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है. ऐसे लोगों की समय पर पहचान और उपचार के लिए सारण जिले में 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक विशेष अनीमिया जांच एवं उपचार अभियान चलाया जायेगा.

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अनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया. छपरा सदर अस्पताल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी, डीआईओ डॉ सुरेंद्र महतो, डीएस डॉ केएम दुबे और डीपीएम अरविंद कुमार शामिल हुए. सोनपुर, बनियापुर, तरैया और मढ़ौरा से भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मी जुड़े.

सदर अस्पताल में 966 महिलाओं और किशोरियों की जांच

अभियान के शुभारंभ के मौके पर सदर अस्पताल में विशेष अनीमिया जांच शिविर लगाया गया. इसमें 966 महिलाओं और किशोरियों की जांच की गयी.

प्रतिदिन 9,900 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि अभियान के दौरान सभी आयु वर्ग के लोगों की अनीमिया जांच की जायेगी. हालांकि किशोरियों और महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जायेगी. जिले में प्रतिदिन 9,900 लाभार्थियों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जांच की व्यवस्था रहेगी. इसके अलावा वीएचएसएनडी, पीएमएसएमए सत्र और आरबीएसके की मोबाइल स्वास्थ्य टीमों के माध्यम से सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों व किशोर-किशोरियों की भी जांच की जायेगी.

डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से होगी जांच

अभियान के दौरान डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर से खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा की जांच की जायेगी. जरूरत के अनुसार लाभार्थियों को आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां और सिरप उपलब्ध कराये जायेंगे. मध्यम और गंभीर अनीमिया के मरीजों को उपचार, परामर्श के साथ जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जायेगा.

अभियान के लिए टेस्ट स्ट्रिप्स, क्यूवेट, लैंसेट, अल्कोहल स्वाब, डिस्पोजेबल दस्ताने और अन्य जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है. जरूरतमंद मरीजों के लिए फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जायेगा.

समय पर पहचान और उपचार पर जोर

सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य अनीमिया से पीड़ित लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है. गंभीर मरीजों को स्थिति बिगड़ने से पहले उच्च स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाया जायेगा. तीन महीने तक चलने वाला यह अभियान स्कूल, स्वास्थ्य संस्थान और समुदाय स्तर तक पहुंचेगा.

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