बिहार की बंजर जमीन पर लहलहाया मखाना, छपरा के किसानों ने 20 एकड़ में खेती कर रचा इतिहास
AI से बनाई गई तस्वीर
छपरा के मंगोलपुर में सालों से बेकार पड़ी जलजमाव वाली जमीन अब किसानों की कमाई का जरिया बनने जा रही है. 20 एकड़ से अधिक क्षेत्र में मखाने की खेती का पहला प्रयोग सफल रहा और फसल तैयार हो चुकी है.
छपरा से आदर्श गुप्ता की रिपोर्ट
Makhana Farming Success : छपरा (सारण). जिस जमीन को किसान सालों से बेकार समझकर छोड़ चुके थे, वही अब कमाई का नया जरिया बनने जा रही है. सारण के जलालपुर प्रखंड के मंगोलपुर गांव में किसानों ने जलजमाव वाली 20 एकड़ से अधिक जमीन पर मखाने की खेती का सफल प्रयोग किया है. कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में शुरू किया गया यह प्रयोग अब रंग लाता दिख रहा है और खेतों में मखाने की फसल तैयार हो चुकी है.
सालभर पानी में डूबी रहती थी जमीन, खेती करना था मुश्किल
मंगोलपुर गांव के पास स्थित चवर क्षेत्र में लंबे समय से जलजमाव की समस्या बनी हुई थी. निचले इलाके में पानी जमा रहने के साथ घने जंगल के कारण यहां सामान्य फसलों की खेती करना लगभग असंभव था. यही वजह थी कि किसान इस जमीन का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे.
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कृषि वैज्ञानिकों ने खोजा मखाने की खेती का रास्ता
इलाके का निरीक्षण करने के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने यहां की प्राकृतिक परिस्थितियों को मखाने की खेती के अनुकूल पाया. इसके बाद किसानों को मखाने की खेती की तकनीक और जरूरी प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण मिलने के बाद किसानों ने प्रयोग के तौर पर 20 एकड़ से अधिक जलजमाव वाली जमीन में मखाने की खेती शुरू की.
बेकार समझी जाने वाली जमीन पर अब तैयार है मखाने की फसल
किसानों का यह प्रयोग सफल रहा है. खेतों में मखाने की फसल अब तैयार हो चुकी है और जल्द ही इसकी कटाई शुरू होने की उम्मीद है. स्थानीय किसान आशू कुमार और रविंद्र चौहान के अनुसार, इस प्रयोग से किसानों में नई उम्मीद जगी है.
पहली फसल से अच्छी आमदनी हुई तो बढ़ेगा रकबा
किसानों को उम्मीद है कि पहली फसल से अगर अपेक्षित आमदनी होती है तो आने वाले वर्षों में इस इलाके में मखाने की खेती का दायरा और बढ़ाया जा सकता है. जिस जमीन से अब तक कोई आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा था, वही जमीन किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकती है.
मखाने की खेती से गांव में रोजगार की भी उम्मीद
मखाने की खेती सफल होने का फायदा सिर्फ जमीन मालिकों तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है. इसकी बुवाई, देखभाल, कटाई और प्रसंस्करण से जुड़े कामों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है. किसानों का कहना है कि बड़े स्तर पर उत्पादन होने पर सैकड़ों किसानों और मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.
जिलाधिकारी ने भी खेतों का किया निरीक्षण
मखाने की खेती के इस प्रयोग की सफलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर फसल का निरीक्षण किया. प्रशासन की ओर से किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता और अनुदान का लाभ दिलाने का आश्वासन भी दिया गया है.
सरकारी मदद मिली तो दूसरे किसान भी अपनाएंगे मॉडल
सरकारी सहयोग मिलने से किसानों की लागत कम करने में मदद मिल सकती है. साथ ही आसपास के दूसरे किसान भी जलजमाव वाली जमीन के लिए मखाने की खेती को एक विकल्प के रूप में अपना सकते हैं.
मंगोलपुर ने दिखाया, बेकार जमीन भी बन सकती है कमाई का जरिया
मंगोलपुर का यह प्रयोग इसलिए खास है क्योंकि किसानों ने लंबे समय से अनुपयोगी मानी जाने वाली जमीन को मखाने की खेती के लिए इस्तेमाल किया है. अगर उत्पादन और बाजार दोनों स्तर पर यह प्रयोग सफल रहता है, तो सारण के जलजमाव वाले दूसरे इलाकों में भी मखाने की खेती की नई संभावनाएं खुल सकती हैं.
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