विजय हत्याकांड में 2 महीने से जेल में पंचायत समिति सदस्य, जांच अधूरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठ रहे सवाल

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हलई थाना क्षेत्र

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समस्तीपुर में विजय हत्याकांड को दो महीने बीत चुके हैं, जिसमें एक पंचायत समिति सदस्य दो माह से जेल में बंद हैं. वहीं, पुलिस जांच अब तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

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समस्तीपुर: हलई थाना क्षेत्र के बनबीरा पंचायत के पंचायत समिति सदस्य रामानंद राय पिछले करीब दो माह से विजय हत्याकांड के सिलसिले में जेल में बंद हैं. वहीं, हलई निवासी गोपाल पंडित के पुत्र विजय कुमार की मौत के मामले में पुलिस की जांच अब तक किसी स्पष्ट निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है. मामले को लेकर मृतक के परिजन जहां न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं आरोपी पक्ष भी निष्पक्ष जांच की गुहार लगा रहा है.

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पुलिस की ओर से मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किये जाने की बात कही जा रही है. इस बीच स्थानीय लोगों के बीच मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई है, तो मामले में आरोपित अन्य लोगों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई. वहीं, यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट हत्या की पुष्टि नहीं करती है, तो पंचायत समिति सदस्य रामानंद राय को अब तक जेल में क्यों रखा गया है.

मामले को लेकर क्षेत्र में लगातार चर्चा और आवाज उठ रही है. मृतक के परिजन घटना की सच्चाई सामने आने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर, जेल में बंद पंचायत समिति सदस्य के समर्थकों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. यदि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, तो उन्हें न्याय मिलना चाहिए.

जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी मौत की वजह

फिलहाल मामला पुलिस की जांच के स्तर पर लंबित बताया जा रहा है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विजय की मौत किन परिस्थितियों में हुई और मामले में किन लोगों की भूमिका है. जांच पूरी होने तक मामले को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं.

विदित हो कि एक शादी समारोह के दौरान मारपीट की घटना के बाद विजय की मौत की खबर आयी थी. इस मामले में दर्जन भर लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. पंचायत समिति सदस्य रामानंद राय को पुलिस ने घटना के चार दिन बाद ही गिरफ्तार कर लिया था. उसके बाद से मामला लगातार जांच के पेंच में फंसे होने की बात बतायी जा रही है.

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