समस्तीपुर: परंपरागत खेती से आगे बढ़ें किसान, औषधीय धान बनेगी मुनाफे का नया जरिया 

Published by : Purushottam Kumar Updated At : 04 Jun 2026 1:35 PM

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राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा

Samastipur News: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में औषधीय धान की खेती की संभावनाओं पर व्याख्यान. धान वैज्ञानिक डॉ. नीलंजय और डॉ. दिनेश राय ने किसानों को दी कड़क आर्थिक लाभ की जानकारी. जानिए खबर विस्तार से…

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Samastipur News:बिहार के पारंपरिक कृषि परिदृश्य में अब एक नया और कड़क बदलाव देखने को मिल रहा है. धान उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार बिहार में अब ‘औषधीय धान’ (Medicinal Rice) की खेती की व्यावसायिक संभावनाएं काफी तेजी से बढ़ रही हैं. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा के प्लांट पैथोलॉजी विभाग में औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण शिविर के दौरान बुधवार (3 जून 2026) को कृषि वैज्ञानिकों ने इस नई कृषि तकनीक और इसके आर्थिक फायदों पर विस्तार से चर्चा की.

सेहत का अनोखा संगम

प्रशिक्षण सत्र के दौरान विश्वविद्यालय के वरिष्ठ धान वैज्ञानिक डॉ. नीलंजय ने औषधीय धान की महत्ता पर विशेष व्याख्यान दिया. उन्होंने कहा कि बिहार की जलवायु और मिट्टी धान की इस विशेष प्रजाति के लिए बेहद अनुकूल है. वर्तमान समय में बाजार और स्वास्थ्य क्षेत्र में औषधीय धान की मांग में जबरदस्त इजाफा देखा जा रहा है.

किसानों को मिलेगा बंपर मुनाफा

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह धान न केवल देखने में बेहद आकर्षक होता है, बल्कि इसका स्वाद भी आम उपभोग वाले चावल से काफी बेहतर और अनूठा होता है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस धान की खेती से सामान्य धान की तुलना में किसानों को कई गुना बेहतर आर्थिक लाभ मिलता है, जिससे उनकी आय में कड़क बढ़ोतरी सुनिश्चित होगी.

कई गंभीर बीमारियों में रामबाण है औषधीय धान

विशेषज्ञों के मुताबिक, औषधीय धान में कई तरह के जरूरी पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट्स और औषधीय गुण पाए जाते हैं. यह चावल मधुमेह (डायबिटीज), रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और पाचन क्रिया से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित मरीजों के लिए एक बेहतरीन आहार साबित हो रहा है. स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब बाजार में ऊंचे दामों पर भी इस विशेष चावल की मांग कर रहे हैं, जिससे इसके विपणन (मार्केटिंग) की अपार संभावनाएं पैदा हो गई हैं.

इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र की कड़क मॉनिटरिंग वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. दिनेश राय एवं डॉ. मनोज कुमार द्वारा संयुक्त रूप से की जा रही है. कृषि विश्वविद्यालय के इस विशेष सत्र में नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं और कृषि छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

किसानों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा

इस मौके पर सलोनी कुमारी, पुष्पा राज, रिंकू कुमारी, कल्पना कुमारी, रोहित राज, नीतीश कुमार भारद्वाज, सुजीत कुमार कुशवाहा, जयनिश कुमार कुशवाहा, आयुष कुमार, संजीव कुमार झा, रोहन कुमार, यश कुमार और राहुल राज सहित दर्जनों प्रगतिशील किसान और कृषि प्रेमी मुख्य रूप से उपस्थित रहे. वैज्ञानिकों ने युवाओं से अपील की है कि वे इस नई और आधुनिक खेती को अपनाकर बिहार को कृषि स्टार्ट-अप का मुख्य केंद्र बनाएं.

समस्तीपुर से सुभाष कुमार की रिपोर्ट

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