समस्तीपुर में मातृ वंदना योजना की समीक्षा, मोहनपुर नंबर वन तो सदर प्रखंड फिसला सबसे नीचे

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समस्तीपुर में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की प्रगति रिपोर्ट जारी। मोहनपुर सबसे आगे, जबकि सदर और वारिसनगर प्रखंड काफी पीछे हैं। जानें पूरी जानकारी।

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PMMVY  Yojana Samastipur: समस्तीपुर जिले में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के क्रियान्वयन की रफ्तार काफी धीमी बनी हुई है. जिले की कुल औसत प्रगति दर महज 27.0 प्रतिशत दर्ज की गई है. प्रखंडवार समीक्षा में 43.8 प्रतिशत उपलब्धि के साथ मोहनपुर प्रखंड जिले भर में शीर्ष स्थान पर काबिज है, जबकि प्रशासनिक केंद्र समस्तीपुर सदर और वारिसनगर जैसे बड़े प्रखंड सूची में सबसे निचले पायदान पर खिसक गए हैं.

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मोहनपुर पहले पायदान पर, सदर प्रखंड की स्थिति सबसे खराब

विभागीय आंकड़ों के अनुसार दलPMMVY  Yojana Samastipurसिंहसराय 35.0 प्रतिशत के साथ दूसरे, खानपुर 34.5 प्रतिशत के साथ तीसरे और ताजपुर 33.9 प्रतिशत उपलब्धि के साथ चौथे स्थान पर रहा. औसत प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों में विभूतिपुर (28.7%), सिंघिया (27.8%), हसनपुर (27.6%), शिवाजीनगर (26.3%) और सरायरंजन (25.8%) शामिल हैं. वहीं सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों में कल्याणपुर 22.8 प्रतिशत, वारिसनगर 18.9 प्रतिशत और समस्तीपुर सदर महज 16.8 प्रतिशत प्रगति के साथ अंतिम स्थान पर है.

जिले में 73 फीसदी पात्र महिलाएं योजना के लाभ से वंचित

जिले में निर्धारित 29,043 के कुल लक्ष्य के विरुद्ध अब तक केवल 10,687 से 10,757 लाभार्थियों के आवेदन ही स्वीकृत या प्रक्रियाधीन हो सके हैं. पोर्टल पर धीमी डेटा अपलोडिंग और पेमेंट जेनरेशन में हो रही देरी के कारण जिले की लगभग 73 प्रतिशत पात्र गर्भवती और धात्री महिलाएं आज भी सरकारी सहायता राशि पाने की बाट जोह रही हैं.

प्रथम संतान पर ₹5,000 और दूसरी कन्या संतान पर मिलते हैं ₹6,000

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित इस प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को बेहतर पोषण देना और मजदूरी के नुकसान की भरपाई करना है. प्रथम संतान के जन्म पर लाभार्थी को दो किस्तों में ₹5,000 दिए जाते हैं. वहीं दूसरी संतान के रूप में कन्या जन्म को प्रोत्साहित करने और लिंगानुपात सुधारने के लिए एकमुश्त ₹6,000 की विशेष सहायता राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है.

पेंडिंग आवेदनों के त्वरित निस्तारण की सख्त जरूरत

योजना का लाभ 19 वर्ष या उससे अधिक आयु की सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की पात्र महिलाओं को मिलता है. अधिकारियों का मानना है कि जब तक प्रखंड स्तर पर तकनीकी बाधाएं दूर नहीं होंगी और लंबित आवेदनों का तेजी से निस्तारण नहीं होगा, तब तक शत-प्रतिशत लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाना संभव नहीं होगा.

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